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चार सड़कों के पैकेज को पलीता लगाकर टर्मिनेट हुई जीडीसीएल, पेटी कांट्रेक्टरों ने जब लगाई रकम मांगी तो दी एफआईआर की धमकी / Shivpuri News

शिवपुरी। एमपीआरडीसी से जिले की चार सड़कों का पैकेज लेने वाली इंटरनेशनल कंपनी जीडीसीएल (गेनन डेकन कॉपोरेशन लिमिटेड) को विभाग ने टर्मिनेट कर दिया है। टर्मिनेट होने से पहले कंपनी पैकेज में शामिल सिंहनिवास से खुरई, करैरा से भितरवार, पड़ोरा चौराहे से पिछोर और पिछोर से बसई सड़क निर्माण को काफी हद तक पलीता लगा चुकी थी। जब सड़कों के निर्माण कार्य में अनियमित्ता और लेट-लतीफी की जानकारी विभाग को लगी तो विभाग ने शासकीय प्रक्रिया के अंतर्गत जीडीसीएल को कई मौके देकर अंतत: उसे टर्मिनेट कर दिया। जब कंपनी अधिकृत तौर पर टर्मिनेट नहीं हुई थी अौर कार्यादेश के बाद कंपनी ने कार्य करना प्रारंभ किया था तब कंपनी ने सड़क निर्माण के लिए जिन स्थानीय ठेकेदारों को अनुबंध करके विधिवत कार्य दिया था उन ठेकेदारों का लाखों-करोड़ों रुपया कंपनी पर आज भी बकाया है। कंपनी के जो प्रतिनिधि हैं वह कंपनी के टर्मिनेट हो जाने के बाद कंपनी का जो साजो-सामान है उसे समेटकर कंपनी के मुख्यालय मुंबई और प्रमुख कार्यालय दिल्ली पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं। कंपनी के इस प्रयास से स्थानीय ठेकेदारों में हड़कंप मचा हुआ है। करैरा के बालाजी मेटल्स के प्रो. वीरेंद्र साहू का कहना है कि मैंने कंपनी के अनुबंध पर गिट्टी बनाकर देने का काम किया था, जिसका तकरीबन 1 करोड़ से अधिक रुपया मेरा लेना निकल रहा है। लाख प्रयासों के बावजूद कंपनी मेरा पैसा नहीं दे रही है जिसकी वजह से मेरे ऊपर कर्ज चढ़ गया है। मेरे साथ जो वर्किंग पार्टनर थे जिनकी पूंजी कार्य में लगी है वह भी बहुत परेशान है। अगर हमारा भुगतान हमें शीघ्र नहीं मिला तो हम कहीं के नहीं रहेंगे। यह िस्थति अकेले वीरेंद्र साहू और उनके पार्टनरों की नहीं है। जीडीसीएल कंपनी के सताए हुए लोगों की संख्या आरोपित तौर पर कहीं अधिक है। जहां-जहां सड़क निर्माण का कार्य कंपनी ने किया है वहां-वहां कथित तौर पर स्थानीय लोगों को जोड़कर उनसे कार्य लिया गया जिसमें उनकी पूंजी फंस गई। कुल मिलाकर कहने का आशय यह है कि जीडीसीएल कंपनी टर्मिनेट होने से पहले आर्थिक तौर पर जिले के कई ठेकेदारों को बड़े आर्थिक गड्ढे में धकेल चुकी है।

टर्मिनेट के बाद भी कराया अन्य फर्मों से कार्य

एमपीआरडीसी ने अनियमितताओं के आरोप में घिरी जीडीसीएल को टर्मिनेट कर दिया। टर्मिनेशन की जानकारी होने के बावजूद कंपनी के प्रतिनिधियों ने पैकेज कार्य के लिए अन्य फर्मों से अनुबंध करके उनसे साइडों पर काम करा लिया। जब ठेकेदारों का बड़ा पैसा फस गया और उन्हें भुगतान के नाम पर कुछ भी हाथ नहीं लगा तो ठेकेदारों ने कंपनी की पड़ताल एमपीआरडीसी से की तब उन्हें यह जानकारी मिली कि जीडीसीएल तो चार रोड़ों के पैकेज वर्क से कब की टर्मिनेट हो चुकी है। इस जानकारी के बाद जीडीसीएल से अनुबंध कर कार्य करने वाली फर्मों के होश उड़ गए। जब इन फार्मो ने अपने भुगतान के लिए कंपनी के साइड पर कार्य करने वाले प्रतिनिधियों से संपर्क किया तो उन्होंने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि आप सीधे कंपनी के मुख्यालय पर बात करें।

अब जहर खाने के अलावा कोई रास्ता नहीं : वीरेंद्र साहू

बालाजी मेटल्स के प्रो. वीरेंद्र साहू का कहना है कि मेरी फर्म का करीब 1 करोड़ 18 लाख 3 हजार 424 रुपया सन् 2018 से कंपनी से लेना निकल रहा है। मेरे सारे प्रयासों के बावजूद कोई हल नहीं निकल रहा है। मेरी आर्थिक िस्थति यह है कि मेरे पास घर खर्च के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं मुझ पर कर्जा भी चढ़ गया है। अब अगर जल्द मुझे पैसा नहीं मिला तो मैं किसी भी दिन जहर खाकर आत्महत्या कर लूंगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी जीडीसीएल कंपनी की होगी। वीरेंद्र साहू ने बताया कि तीन साल में मुझे कंपनी के द्वारा लगातार यह मौखिक आश्वासन दिए गए कि आपका पैसा खरा है, कंपनी देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन एक पैसा भी इन सालों में मुझे नहीं दिया। हद यह है कि चोरी-छिपे कंपनी के नुमाइंदे प्रोजेक्ट में उपयोगी सभी संसाधनों को समेटकर ले जाने की फिराक में है।

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