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मेडिकल कॉलेज में भर्ती को लेकर फर्जीबाड़ा, रुपए लेकर दी जा रही नियुक्तियां, दलाल भी सक्रिय, अब व्यापमं घाेटाले से जुड़ा मेडिकल कॉलेज का नाम / Shivpuri News

 

शिवपुरी। मेडीकल कॉलेज में हुई भर्ती को लेकर फिर से विवाद उठने लगा है। यहां अधिकतर भर्तिया लेनदेन लेकर की गई है जिसके लिए दलाल भी सक्रिय रहे। भर्ती चाहे नर्स पद की हो या फिर सफाई, कर्मचारी, कम्प्यूटर ऑपरेट, वार्ड वाय या अन्य हर भर्ती में दलाल सक्रिय रहे और रुपए लेकर भर्ती की गई और अभी भी जिन पदों में भर्ती हो रही है उसमें फर्जीबाड़ा चल रहा है।

इतना ही नहीं अब शिवपुरी मेडिकल कॉलेज का नाम व्यापमं कांड के मुख्य आरोपित रहे डॉ. दीपक यादव से भी जुड़ गया है। कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया को की गई शिकायत में कहा है कि मेडिकल कॉलेज शिवपुरी के डीन डॉ. अक्षय निगम व्यापमं कांड के मुख्य आरोपित डॉ. दीपक यादव द्वारा प्रायोजित कार्य अपने सहयोगी डॉ. केबी वर्मा (अधीक्षक) के जरिए व्यापमं कांड की तर्ज पर बड़ी भर्ती रैकेट चलाकर योग्य युवाओं के भरोसे से खिलवाड़ कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में करीब 200 कर्मचारियों को ठेके पर नियुक्ति दी गई है। इसके एवज में डॉ. केबी वर्मा पर हर कर्मचारी से 40 से 50 हजार रुपये लेने के आरोप लगे हैं। जिन कर्मचारियों से रुपये लिए गए हैं उनके ही नाम ठेके वाली फर्म को सौंपे गए हैं।

इसी तरह हाल ही में यहां 198 स्टाफ नर्स के रिक्त पदों पर स्वशासी में नियुक्ति के लिए सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। इसके आवेदन एमपी ऑनलाइन के माध्यम से मांगे गए थे। इसमें डीन डॉ. निगम ने अपने आप को आउटसोर्स कर्मचारी बताने वाले निजी सहायक डॉ. अरुण यादव जो कि व्यापमं कांड के आरोपित डॉ. दीपक यादव का भाई है, के माध्यम से हर कैंडिडेट से 3 लाख रुपये लेकर करीब 50 नर्सों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए हैं। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में आरोपित डॉ. दीपक यादव के भाई डॉ. राहुल यादव को भी नियमों को तोड़ नियुक्ति दी गई है। मेडिकल कॉलेज में बायोकेमेस्ट्री विभाग में आदेश क्रमांक 6315 दिनांक 12.05.2021 द्वारा डॉ. राहुल यादव को प्रदर्शक के पद पर नियुक्ति दी गई है। डॉ. राहुल यादव व्यापम घोटाले के अभियुक्त हैं और वर्तमान में न्यायालय से जमानत पर हैं। डॉ. राहुल व्यापमं कांड के मुख्य आरोपित डॉ. दीपक यादव के छोटे भाई हैं। इनकी नियुक्ति नियम विरूद्ध करने की शिकायत की गई है। अभी तो यह सिर्फ आरोप हैं जिनकी सही स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है, लेकिन अस्पताल के शुरू होने के दो महीने में ही व्यापमं कांड के आरोपितों से इसका नाम जुड़ना और भर्ती को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप कालेज की छवि को खराब कर रहे हैं।

इनका कहना है

जो भी भर्तियां हुई हैं वह एमपी ऑनलाइन के जरिए हुई हैं जिसमें हमारा कोई लेना देना नहीं है। कोरोना काल में एकदम डिमांड आती थी कि इनती दवाओं या इन सुविधाओं की व्यवस्था करना है तो वह परिचित से ही करेंगे। इसके लिए बकायदा नियम भी बने हुए हैं जिनके अंतर्गत हमने काम किया है। सभी काम नियम के तहत हुए हैं।

– डॉ. अक्षय निगम, डीन मेडिकल कॉलेज ।

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