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राज पैलेस होटल संचालक राजमल सेठ अवैध वसूली में अंदर,समाजसेवी नितिन अग्रवाल की जमीन पर कब्जा करने के प्रयास में पुलिस ने मौके से दबोचा / Shivpuri News

शिवपुरी। पुराने बस स्टेंड के पास स्थित राज पेलेस होटल के संचालक राजमल गुप्ता को आज सिटी कोतवाली पुलिस समाजसेवी नितिन अग्रवाल की जमीन पर अवैध कब्जा करने और फिर वसूली के आरोप में मौके से ही दबोच कर ले आयी और फिर अवैध वसूली की धाराओं सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।

शिवपुरी ब्यूरो। बढ़ती बेरोजगारी और मिटते धंधों ने शिवपुरी में भू माफिया का कोढ़ पैदा कर दिया हैं। जमीनों को कब्जाने और जूते के जोर पर हड़पने का खेल शिवपुरी में परम्परागत तौर पर वर्षों से खेला जा रहा हैं। हालत इस हद तक खतरनाक हो गए हैं कि जहां खाली जमीन देखी वहां खण्ड़ा वोल्डर डालकर चौथ बसूली का चलता चलन दम से चला दिया। खण्डा वोल्डर पटक कर बात नहीं बनी तो जूते के जोर पर निर्माण करके जमीन कब्जाने और कोर्ट कचहरी में उलझा देने की चाल चलकर खुली बसूली का उपाय कर डाला। आज दर्रोनी में भी सफेद पोशों ने 20 हजार फुट जमीन को हथियाने के लिए खुलेआम निर्माण करना शुरू कर दिया। जब इसकी जानकारी जमीन के असल मालिक को मिली तो वह विरोध कराने पहुंचा जहां उसके ऊपर आरोपित तौर पर न सिर्फ रिवाल्वर तान दी गई बल्कि उसे यह संदेश भी दो टूक दिया गया कि जमीन बचानी हैं तो दस लाख दे दो नहीं तो जमीन पर निर्माण कर तुम्हारी आंखों के सामने जमीन कब्जा ली जाएगी। सरेआम जूते के जोर पर जमीन हथियाने की चली जा रही चालों से घबराया जमीन का मालिक पुलिस कोतवाली में अपनी शिकायत लेकर पहुंचा तो जमीन के कारोबारियों के बीच आए दिन होने वाले विवादों से नाखुश टीआई बादाम सिंह ने तत्काल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर कड़ी कार्यवाही की। बताया गया है कि पुलिस ने मौके पर ही जबरन निर्माण कर रहे सफेद पोशों को जमीन पर पटक-पटक कर बुरी तरह पीटा। पुलिस के तेबर देखकर सहम गए जमीन कारोबारियों को गाड़ी में डालकर दाखिले हवालात भी दम से कर दिया गया। पुलिस की कार्यवाही को सर्वत्र सराहना हो रही हैं। इस मामले में पुलिस ने फरियादी की रिपोर्ट पर गंभीर धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध आरोपियों के खिलाफ कर लिया हैं।

 

जमीन के खेल में धोखेबाज बने करोड़पति

कलियुग में जमीन और कमीन दोनों के भाव बढऩा तय हैं ऐसी भविष्यवाणी द्वापर युग में की गई थी। शिवपुरी में यह भविष्यवाणी पूरी तरह सच सावित हो रही हैं। जमीनों के कारोबार में कूंद पड़े कमीनों ने करोड़ों के बारे न्यारे करके खुद की कल तक की औकात भी बदल डाली हैं। आज जो करोड़पति बनकर घूम रहे हैं वह बीते कल के सड़क और पटिया छाप थे। इन कमीनों ने सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का फायदा उठाकर सरकारी जमीनें तो बेखौफ अंदाज में लीली ही लीली छोड़ी निजी जमीनें भी नहीं। अधिकारी और कर्मचारियों की मिली भगत से दस्तावेजों में हेरफेर कर इन्होंने शिवपुरी को काले कारोबार और गोरख धंधों की बड़ी मंडी बना दी। उल्लेखनीय है कि सरकारी जमीनों को खुर्दबुर्द करने और उन्हें निजी हाथों में सौंप देने का काला कारनामा तहसील और एसडीएम स्तर पर भी दम से शिवपुरी जिले में अंजाम दिया गया हैं। कई आईएएस तक जमीनों के जंजाल में गले-गले तक फंसे हैं। नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर भी नगरीय क्षेत्र में दम से जमीनों के बारे न्यारे दस्तावेजों में हेरफेर करके खूब किए गए हैं। सरकारी तंत्र की मिली भगत से बनी भ्रष्ट व्यवस्था में आम आदमी अपने हक के लिए सबदूर गिड़गिड़ाता नजर आ रहा हैं जमीनों के गोरख धंधे में आदि काल से चली आ रही कहावत जर जोरू जमीन जोर की, नहीं तो काऊ और की शिवपुरी में पूरी तरह चरितार्थ हो रही हैं। धिक्कार योग्य पक्ष यह है कि जिम्मेदार व्यवस्था पकों ने अपनी पीठ करके अंधेरगर्दी को और बढ़ावा दे रखा हैं

 

धन बल में दवा पूरा तंत्र
जमीनों के गोरख धंधे में धन बल बड़ा आधार हैं यह बल वैश्य वर्ग पर सर्वाधिक हैं इसी वर्ग के अधिकांश नगर पालिका अध्यक्ष भी शिवपुरी में रहे हैं। नगर में जमीनों को लेकर जो भी बड़े विवाद हैं वह वैश्य वर्ग से ही संबंधित हैं। बीते रोज जो ओमप्रकाश जैन ओमी, पवन जैन, मोनू भगवती के बीच आरपार का विवाद हुआ था उसमें प्रमुख लोग वैश्य वर्ग से ही संबंधित हैं आज दर्रोनी में जो विवाद हुआ हैं उसमें भी नितिन अग्रवाल और राजमल गुप्ता दोनों मुख्य किरदार में हैं। जमीनों को लेकर जो भी झगड़ा फंसाद शिवपुरी में हो रहा हैं उसमें वैश्य वर्ग के प्रतिनिधि ही मुख्य भूमिका में हैं। जमीनों को लेकर आए दिन हो रहे बड़े झगड़े और झंझटों के पीछे एक कारण यह भी हैं कि पुलिस ने यह धारणा बना रखी हैं कि वैश्यों का मामला हैं और वैश्य तो व्यवसायी होते है इनका झगड़े टंटों से क्या लेना देना! इस धारणा की बजह और राजनीतिक संरक्षण के चलते जमीन के कारोबारियों के बीच आए दिन जान लेवा संघर्ष के हालात बन रहे हैं आज पुलिस ने जिस तरीके से सबक सफेद पोशों को सिखाया है उससे यह साबित होता है कि पुलिस अब अपनी धारणा बदल रही हैं। यद्धपि यह सच है कि अधिकांश वैश्य वर्ग भला हैं और झंझटों से दूर रहना चाहता हैं लेकिन यह भी सच है कि गिने चुने जमीन कारोबारियों ने पूरे वर्ग को कटघरे में खड़ा करने का काम कर दिया हैं।

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