Fast Samacharफर्जी नोट बने सरकार का सिरदर्द, इनका बोझ कौन उठाएगा?

फर्जी नोट बने सरकार का सिरदर्द, इनका बोझ कौन उठाएगा?

फर्जी नोट बने सरकार का सिरदर्द, इनका बोझ कौन उठाएगा?

देश भर में नोटबंदी से लोग परेशान हैं. जिनकी दिन की शुरुआत बैंक की कतार में लग कर होती है और शाम होने तक वे अपने हाथों में बामुश्किल चंद रुपए लिए नजर आते हैं.
लोग परेशान हैं तो जाहिर है कि सरकार भी इस बात को नजरअंदाज कैसे कर सकती है.सरकार की नोटबंदी का एक मात्र मकसद काले धन पर लगाम कसना था. लेकिन बावजूद इसके कुछ लोग अपने काले धन को सफेद करने में लगे हुए हैं. कुछ लोगों ने ऐसे ही नकली नोट भी छापकर मार्किट में चलाने की कोशिश की है. हालांकि काफी लोग इस मामले में पकड़े भी गए हैं.
आपको बता दें कि मोदी सरकार की नोटबंदी योजना के तहत 15.50 लाख करोड़ में से 13 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोट बैंकों में जमा हो चुके हैं. बाकी बचे तीन सप्ताह में शेष बचे नोट भी बैंकों में जमा होने की पूरी संभावना है.
देश भर में लोगों द्वारा बैंकों में जमा किए गए नोटों में बड़ी संख्या में वे नोट भी शामिल हैं, जिन्हें जाली नोट कहा जाता है. हालांकि अभी तक इसकी जांच नहीं हो पाई है कि ये नोट कितनी संख्या में हैं.
मोदी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बैंकों के पास काम का इतना अधिक दबाव था कि वे इस बात का पता लगाने की कोशिश ही नहीं कर सके कि जमा किए गए नोटों में कोई जाली नोट भी था? रिजर्व बैंक द्वारा विशेष मशीनों के द्वारा जब इन नोटों को गिनने की प्रक्रिया शुरू होगी तभी पता चलेगा कि जमा किए गए नोटों में जाली नोटों की संख्या कितनी है?
रिजर्व बैंक व मोदी सरकार के लिए यह एक नई मुसीबत होगी कि इन जाली नोटों के बदले में दिए जानेवाले नए नोटों की राशि का अतिरिक्त वित्तीय बोझ कौन उठाएगा?
रिजर्व बैंक द्वारा सभी बैंकों को जारी सर्कुलर के अनुसार जाली नोटों की पहचान करने व उसके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की जिम्मेदारी उस बैंक ब्रांच की है, जहां जाली नोट जमा करने के लिए पेश किया गया है.
इतना ही नहीं यदि संबंधित बैंक जाली नोट रिजर्व बैंक के चेस्ट में भेज देती हैं तो उस बैंक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाती है. इतना ही नहीं यदि कोई बैंक अपनी एटीएम मशीन के माध्यम से जमाकर्ताओं को जाली नोट वितरित करती है तो यह माना जाएगा कि संबंधित बैंक जाली नोट चला रही है.
सबसे बड़ी समस्या यह होगी कि सैकड़ों करोड़ रुपए के जाली नोटों का वित्तीय बोझ कौन उठाएगा?
सरकारी व गैर-सरकारी वित्तीय संस्थाओं द्वारा अनुमान लगाया गया है कि प्रतिवर्ष पाकिस्तान 70 करोड़ रुपए के जाली नोट भारतीय अर्थव्यवस्था में खपाने में सफल होता है. रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया द्वारा सरकार को दी गई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में दस लाख करेंसी नोट में से 4 नोट जाली है.
देश के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा कि रिजर्व बैंक को जाली नोटों के बदले असली नोटों का भुगतान करना पड़ेगा.
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