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सूखा राहत की राशि में डेढ़ करोड़ से ज्यादा का घाेटाला, फर्जी किसानों के खातों में डाली गई राशि, कईयों को 10 बार से ज्यादा भुगतान / Shivpuri News

शिवपुरी। जिले में भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन गया है। अधिकारियों से लेकर जानकारी फीट करने वालों तक सब एक साथ मिलकर इस भ्रष्टाचार में सहयोग कर रहे हैं और देश को करोड़ों रुपए का चूना लगा रहे हैं। ऐसा ही मामला जिले की पांच तहसीलों में सामने आया जहां सूखा राहत की राशि बटने के लिए आई लेकिन अधिकारियों ने गोलमाल कर डेढ़ सैकड़ा लोगों के खातों में फर्जी तरीके से डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक राशि का भुगतान कर दिया। मामला का खुलासा जब सामने आया तब महालेखाकार कार्यालय ग्वालियर के ऑडिट दल ने जनवरी एवं फरवरीर 2021 में कलेक्टोरेट कार्यालय शिवपुरी में राहत शााखा के लेखा परीक्षण के दौरान सूखा राहत राशि वितरण का फर्जी भुगतान पकड़ा।

जिले की कोलारस, बदरवास, पिछोर, खनियांधाना और पोहरी तहसील में सूखा राहत राशि का लोगों को फर्जी भुगतान ऑडिट में पकड़ा गया है। पिछोर तहसील में 21 लोगों के खाते में एक से अधिक बार भुगतान कर दिया है। अकेले पिछोर में ही 29.99 लाख रुपए का फर्जी भुगतान हुआ है। ऑफिस में मौजूद बिलों में किसानों का नाम है, लेकिन भुगतान किसी और को कर दिया गया है। उदाहरण के लिए प्रागीलाल अहिरवार को भुगतान दस बार में कुल 2 लाख 65 हजार 612 रुपए का भुगतान हुआ है। जबकि बिल में नाम सुरेश का दर्ज है। जिले की पांचों तहसीलों में हुए फर्जी भुगतान की लिस्ट ऑडिट दल ने बनाकर राजस्व विभाग भोपाल को भेजी। उस लिस्ट के आधार पर ही राजस्व विभाग भोपाल ने संभाग आयुक्त ग्वालियर और शिवपुरी कलेक्टर ने मामले की सूक्ष्म जांच कर प्रतिवेदन मांगा है। जिले से कोलारस, पिछोर व पोहरी एसडीएम को पत्र जारी कर प्रतिवेदन मांगा है। इन फर्जी भुगतान के संबंध में मप्र शासन के राजस्व सचिव से 15 जून 2021 को कलेक्टर शिवपुरी को पत्र जारी कर मामले में सूक्ष्मता से परीक्षण करके वस्तुस्थिति का प्रतिवेदन मांगा है। उसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है। बता दें कि शिवपुरी जिले काे सूखा राहत के रूप में 2017-18 में 142.61 करोड़, साल 2018-19 में 176 करोड़ और 2019-20 में 25.91 करोड़ रुपए की राशि मिली थी। यदि मामले की सही जांच हो तो और भी बड़ा फर्जीवाड़ा निकल सकता है।

यहां बता दें कि पोहरी में करीब 5.49 लाख रुपए का फर्जी भुगतान के तीन मामले, खनियांधााना में 53.39 लाख रुपए के फर्जी भुगतान, कोलारस व बदरवास में करीबन 82.75 लाख रुपए के फर्जी भुगतान किए गए हैं।

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