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शिवपुरी में सिर्फ नाम का खुला मेडीकल कॉलेज, अस्पताल से दो गुनी स्टाफ संख्या, फिर भी हो रहे ग्वालियर रैफर हो रहे मरीज / Shivpuri News

शिवपुरी। श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज शुरू होने के साथ ही शहर को बड़े-बड़े सपने दिखाकर दावे किए गए थे इसके खुलने के बाद जिले से किसी मरीज को रेफर नहीं करना पड़ेगा। इतना ही नहीं श्योपुर, गुना आदि के मरीज तक रेफर होकर मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में आएंगे। कोरोना की दूसरी लहर में अस्पताल शुरू भी हो गया, लेकिन आठ महीने बाद भी अब तक रेफर टू ग्वालियर का चलन बंद नहीं हो पाया है। पिछले आठ महीने में मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में इमरजेंसी और ट्रॉमा ओटी शुरू नहीं हो पाया है। प्रबंधन कुछ दिनों में ही इसके शुरू होने, मशीनरी की कमी होने के बहाने कई महीनों से बना रहा है। स्थिति यह है कि मेडिकल कॉलेज पर नियंत्रण रखने वाले अधिकारी ही खुद इसकी वास्तविक स्थिति से वाकिफ नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्रीय संचालक के कार्यालय से हुए पत्राचार में इस बात पर मोहर लग गई। क्षेत्रीय संचालक ने शिवपुरी स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर निर्देशित किया कि जिला अस्पताल से मरीजों को सीधे ग्वालियर जयारोग्य अस्पताल में रेफर न किया जाए। मरीजों को शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाए और आगामी कार्रवाई वहीं से होगी। इस पर मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. केबी वर्मा ने पत्र लिखकर जवाब दिया कि मुख्य ओटी का कार्य प्रगति पर है इसलिए ट्रॉमा और इमरजेंसी शल्य क्रिया के केस नहीं किए जा रहे हैं। ओटी का कार्य पूर्ण होने पर ही ट्रॉमा और इमरजेंसी केस शुरू किए जाएंगे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर आठ महीने में अब तक मुख्य ओटी शुरू क्यों नहीं हो पाया।

अक्टूबर के महीने में शिवपुरी के मरीज को ग्वालियर रेफर करने के बाद यह पूरा मामला शुरू हुआ था। मरीज राजाराम को शहर के एक निजी अस्पताल से ग्वालियर के जेएएच रेफर कर दिया था। जेएएच से उसे निजी अस्पताल रेफर कर दिया जहां उसका एक दिन का बिल डेढ़ लाख रुपये बन गया। इसकी जानकारी कोलारस विधायक वीरेंद्र रघुवंशी को लगी तो वे ग्वालियर पहुंचे और मरीज को डिस्चार्ज कराकर आगे का इलाज कराया। इसके बाद विधायक ने ग्वालियर संभाग के कमिश्नर को शिकायती पत्र लिखा। इसके बाद कमिशनर द्वारा जांच कराई गई और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्रीय संचालक को निर्देश दिए कि शिवपुरी जिला अस्पताल से मरीज ग्वालियर के बजाए जीएमसी रेफर करने के लिए आदेशित करें।

पत्राचार से ही उठे सवाल, ओटी में नॉन इमरजेंसी ऑपरेशन, लेकिन इमरजेंसी नहीं

क्षेत्रीय संचालक द्वारा सिविल सर्जन को निर्देश दिए गए कि मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर करें यानी उन्हें इस बात की जानकारी नहीं कि शिवपुरी मेडिकल कॉलेज का ओटी अब तक शुरू नहीं हो पाया है और वहां पर रेफर मरीजों को लिया ही नहीं जा रहा है। दूसरा सवाल खुद अधीक्षक केबी वर्मा के जवाबी पत्र से उठता है। इसमें उन्होंने लिखा है कि इमरजेंसी ओटी में नॉन इमरजेंसी शल्य क्रिया (अस्थि रोग, नाक कान एवं गला रोग एवं सर्जरी विभाग) के केस किए जा रहे हैं। खुद अधीक्षक इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि इमरजेंसी ओटी वर्किंग है और वहां सर्जरी भी हो रही हैं, लेकिन अभी इमरजेंसी सर्जरी संभव नहीं हैं।

हर दिन करीब 10 मरीज होते हैं रेफर

जिला अस्पताल से हर दिन करीब 10 इमरजेंसी केस ग्वालियर रेफर किए जाते हैं। जुलाई के महीने में 208 केस, अगस्त में 302 केस, सितंबर में 412 केस के साथ अक्टूबर में भी करीब 400 केस रेफर किए गए। इस तरह औसतन यहां से 10 केस हर दिन ग्वालियर रेफर होते हैं। ग्वालियर रैफर करने, वहां पहुंचने आदि की प्रक्रिया में मरीज को करीब तीन घंटे का समय लग जाता है। चूंकि मरीज पहले ही इमरजेंसी की स्थिति में ऐसे में एक-एक मिनट बहुत कीमती होता है। इस फेर में कई मरीज जान भी गंवा बैठते हैं। यदि मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी सुविधाएं शुरू हो जाएं तो जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज पहुंचने में 15 मिनट का ही समय लगेगा। इससे कई लोगों की जान बचाई जा सकेगी।

जिला अस्पताल के मुकाबले ढाई गुना स्टाफ

मेडिकल कॉलेज में जिला अस्पताल के मुकाबले ढाई गुना से अधिक स्टाफ है। जिला अस्पताल में 50 से भी कम डॉक्टर हैं जबकि मेडिकल कॉलेज में इनकी संख्या 150 के लगभग है। यहां का अस्पताल भी 300 बेड का है। इतना स्टाफ और उन पर हर महीनों करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जिलेवासियों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। अभी यहां पर सिर्फ ओपीडी संचालित की जा रही है। यदि ओपीडी में कोई मरीज को भर्ती करने की आवश्यकता लगती है तो उसे भर्ती कर दिया जाता है।

इनका कहना है…

जिला अस्पताल से इमरजेंसी के मरीज ही रैफर किए जाते हैं। मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी का मरीज लेते नहीं हैं इसलिए हमें ग्वालियर ही रैफर करने पड़ते हैं।

-डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर, सिविल सर्जन जिला अस्पताल

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