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माधव नेशनल पार्क में 2 दिसम्बर से वन्य जीवों की गणना हुई शुरू / Shivpuri News

-टाइगर के लिए पर्याप्त भोजन पार्क हैं या नहीं इसलिए बड़ाए जाऐंगे शाकाहारी जानवर

-आज से 45 कैमरे लगाकर शुरू हुई रिकॉर्डिंग

 

शिवपुरी ब्यूरो। माधव नेशनल पार्क में पिछले वर्ष 2018 में जुई वन्य जीवों की गणना की गई थी, लेकिन जब से आज तक वन्य जीवों की गणना नहीं की गई। जैसे ही शिवपुरी माधव नेशनल पार्क में टाइगर लाने की प्रक्रिया शुरू की हैं उसी के जल्द अब उसके भोजन के लिए पर्याप्त व्यवस्था हैं या नहीं इस बात को ध्यान में रखते हुए वन्य जीवों की एक बार गणना पुन: प्रारंभ कर दी गई हैं। यह 1 दिसम्बर से प्रारंभ की गई हैं। टाइगर के आने के पहले सबसे बड़ा सवाल यह है कि टाइगर के लिए पर्याप्त भोजन पार्क में उपलब्ध होगा या नहीं। टाइगर पिंजरे में नहीं, बल्कि वहां प्राकृतिक वातावरण में रहेगा। ऐसे में उसके लिए पर्याप्त शाकाहारी जानवरों की उपलब्धता जरूरी है। जिससे वह आसानी से शिकार कर सके और आराम से रह सके। इन कैमरों में 21 दिन तक रिकॉर्डिंग करने के बाद एनालिसिस की जाएगी कि साल 2018 की गणना के बाद से यहां कितने जानवर बड़े हैं। साथ ही टीम यह भी देखेगी कि इतने जानवरों की संख्या टाइगर के लिए पर्याप्त होगी या नहीं। इसके लिए गुरुवार को वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर की टीम ने नेशनल पार्क प्रबंधन अधिकारियों और कर्मचारियों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से वैज्ञानिक डॉ. तनुज और डॉ. ऋषि शिवपुरी में आए हैं। एनटीसीएम के साथ 18 नवंबर को सीसीएफ सीएस निनामा की महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली में होना थी, लेकिन दिल्ली में बने प्रदूषण के हालात के कारण रद्द हो गई थी। अब यह बैठक इसी माह ऑनलाइन करने पर विचार किया जा रहा है। इसमें एनटीसीए टाइगर के लिए जरूरतें बताएगा जिसे पूरा करने के संबंध में नेशनल पार्क काम शुरू कर देगा।

टाइगर कोरिडोर में होंगे दो घेरे

माधव राष्ट्रीय उद्यान में बाघ लाने से पहले उसकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके लिए खाली कराए जा रहे गांव सहित पार्क के अन्य भाग में टाइगर के लिए बनने वाला कॉरिडोर दो घेरों में होगा। पहला घेरा छोटा होगा, जिसमें बाघों को लाकर रखा जाएगा, जबकि छोटे घेरे को कवर्ड करते हुए दूसरा घेरा भी बनाया जाएगा। तीन-चार महीने छोटे घेरे में रखने के बाद जब बाघ पार्क के जंगल की आबोहवा में रच-बस जाएंगे तो फिर उन्हें दूसरे घेरे में छोडऩे के साथ ही पार्क के जंगल में घूमने की पूरी आजादी रहेगी। अभी हाल ही में 125 हेक्टेयर क्षेत्र में यह तैयारी की गई हैं।

बैठक में हुई टाइगर की सेहत को लेकर चर्चा

टाइगर के पुर्नवास के संबंध में एक दिन पहले सीसीएफ ने अधिकारियों के साथ एक बैठक आयोजित की। इसमें टाइगर से संबंधित स्वास्थ्य एवं सेहत से संबंधित पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। पीएचई एवं नगर पालिका की टीम के माध्यम से माधव नेशनल पार्क आ रहे पानी पर विस्तृत रूप से चर्चा की क्योंकि यह पानी शिवपुरी के नालों से होकर जाधव सागर के माध्यम से पहुंचता हैं। इसमें कास्टिक सोडो, साबुन युक्त पानी रहता है। जिसकी विधिवत टेस्टिंग कराकर ही पहुंचाया जाए जिससे पानी के उपयोग से किसी भी प्रकार की जानवरों को परेशानी न हो। इसके अतिरिक्त बड़ी झील के माध्यम से अलग से पानी की व्यवस्था की जाएगी जिसकी टेस्टिंग भी कराई जाएगी।

शाकाहारी वन्यप्राणियों की संख्या बड़ेगी तब होंगे टाइगर के लिए माकूल हालात

पार्क की जद में आ रहे पांच गांव का मसला भी अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। यहां पर कुछ लोगों ने खेती के लिए बीज डाल दिए हैं। यहां पर नेशनल पार्क प्रबंधन भी शाकाहारी पशुओं के लिए चारागाह बना रहा है। इस जमीन पर जेसीबी से गड्ढे करवाकर घास का बीज डाला गया है। दूसरी ओर यहां के अतिक्रमणकारी अभी भी कुछ माह का समय मांग रहे हैं, लेकिन अब प्रबंधन उन्हें किसी भी तरह की मोहलत देने के मूड में नहीं है। जंगल में शाकाहारी वन्यप्राणियों की संख्या बढ़ाने के लिए पौधे और घास की प्रजातियां बढ़ाने के साथ पर्याप्त जलस्रोत बनाए जाएंगे। इस क्षेत्र में तेंदुए, लकड़बग्घा, चीतल, सांभर, खरगोश, जंगली सुअर, नीलगाय आदि वन्य प्राणी हैं।

इनका कहना है

वन्यप्राणियों की गणना प्रारंभ कर दी हैं। संख्या में कितना इजाफा हुआ है इसकी जानकारी गणना पूर्ण होने पर ही पता चलेगा। टाइगर लाने के संबंध में सभी काम तेजी से किए जा रहे हैं। उम्मीद है जल्द ही टाइगर का पुर्नवास किया जा सकेगा।

– अनिल सोनी

उपसंचालक, माधव राष्ट्र्रीय उद्यान

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