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स्वराज के साथ स्वत्व को साकार करने की चुनौती : विसपुते / Shivpuri News

 

सांस्कृतिक संस्कारों के सरंक्षण में संघ का कार्य अभिनंदनीय:शुक्ल

मेडिकल कॉलेज में अमृत महोत्सव संगोष्ठी संपन्न

शिवपुरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक श्री दीपक विसपुते ने शिवपुरी में आयोजित एक प्रबुद्धजन गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि 1947 में स्वराज की स्थापना तो हुई लेकिन राष्ट्र के मूल तत्व स्व की स्थापना का भाव तिरोहित कर दिया गया।उन्होंने कहा कि स्वाधीनता के अमृत महोत्सव में हमें उन प्रयासों और भूमिकाओं को तलाशना होगा जो भारत के लोकजीवन,प्रशासन, राजनीति, शिक्षा और संस्कृति में स्व के उस भाव को पुनर्जीवित कर सकें जिसके लिए इतिहास में हजारों गुमनाम सेनानियों ने अपना बलिदान दिया है।उन्होंने कहा कि पूरी दुनियां में अपने स्व के लिए भारत जैसा अनथक संघर्ष का उदाहरण नही मिल सकता है। औपनिवेशिक ताकतों के विरुद्ध सँघर्ष में भारत जैसी जिजीविषा अन्यत्र नही मिलती है।

उन्होंने कहा कि हमारे मूल्यों,अस्मिता और परम्पराओं के प्रति समाज की प्रतिबद्धता सदैव सर्वोपरि प्राथमिकता पर रही है इसके लिए समाज के हर वर्ग ने राष्ट्र के हर हिस्से में अपना यथासंभव प्रतिकार किया है।1498 में पुर्तगालियों के विरुद्ध से आरम्भ हुए इस संघर्ष में भारत के हजारों रणबाकुरों ने अपनी आहुति राष्ट्र को केंद्र में रखकर ही दी।उन्होंने कहा कि त्रावणकोर के राजा मार्तंड वर्मा से लेकर, बाबू गेरू तात्या टोपे,रानी झांसी,भीमा नायक,भगवान बिरसा मुंडा रघुनाथ ,शंकर शाह,ऐसे नाम है जो यह प्रमाणित करते है कि भारत में स्वत्व को लेकर समाज का हर वर्ग बाहरी ताकतों के विरुद्ध सदैव मुखर रहकर अपना बलिदान देता रहा है।

श्री विसपुते ने कहा कि स्वाधीनता के अमृत प्रसंग में हम इस बात पर भी विचार करें कि हमारी आने वाली पीढ़ी को हम इस वैभवशाली और बलिदानी इतिहास से रूबरू कराएं।साथ ही हम आज के सुविधाजनक स्वतंत्र भारत में अपनी भूमिका को भी स्वनिर्धारित करने का संकल्प ले कि भारत के लोकजीवन में स्व की पुनर्स्थापना में हम कैसे योगदान दे सकते हैं।उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत बनाने के लिए हमें इतिहास, संस्क्रति और सामाजिक सरोकारों केंद्रित नागरिक जीवन को अपना आधार बनाकर चलें।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए आईटीबीपी के डीआईजी राजीवलोचन शुक्ल ने कहा कि भारत का इतिहास महज औपनिवेशिक समर तक सीमित नही है। इस महान भारत के निर्माण में असंख्य बलिदानियों ने बगैर किसी प्रशस्ति या महिमामंडन की कामना से ऊपर उठकर अपना उत्सर्ग किया है।दुर्भाग्य से स्वतंत्र भारत के सार्वजनिक विमर्श में चिन्हित चेहरों को ही अधिमान्यता प्रदान की गई है।श्री शुक्ल ने कहा कि अब सुखद बदलाव की स्थितिया निर्मित हो रही है जब इतिहास के गुमनाम नायकों को लोग स्थानीय स्तर पर अपनी अस्मिता और गौरव के साथ जोड़कर देखने लगे है।श्री शुक्ल ने आरएसएस को राष्ट्र का महान संगठन बताते हुए कहा कि संघ के लोग बगैर किसी अपेक्षा के राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका का निर्वहन करते रहें है। राष्ट्र के सांस्कृतिक सरोकारों को सरंक्षित करने में संघ का योगदान अभिनंदनीय है।

गोष्ठी मंच पर आरएसएस के जिला संघचालक विपिन शर्मा,सह संघचालक डॉ गोविंद सिंह मौजूद रहे।गोष्ठी का संचालन डॉ अजय खेमरिया ने किया और आभार प्रदर्शन की रस्म मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ अक्षय निगम ने पूरी की।

गोष्ठी में शहर के अनेक चिकित्सक,कारोबारी,वकील,कृषक,कलाकार, समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।इस अवसर पर राहुल शिवहरे ने गीत प्रस्तुत किया।

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