Fast Samacharकोविड वॉलेंटियर्स पर भी भारी पड़ गई राजनीति

कोविड वॉलेंटियर्स पर भी भारी पड़ गई राजनीति

 

शिवपुरी। आखिरकार जिले के कोरोना वॉरियर्स और वॉलेंटियर्स भी सस्ती और फ़र्जी राजनीति का शिकार हो गए। विगत दिनों जिले में कोविड 19 महामारी के प्रकोप के समय कोरोना वॉरियर्स और वॉलेंटियर्स की एक टीम का गठन किया गया था।इसमें जो लोग महामारी के समय मरीजों,उनके परिजनों और ज़रूरतमंदों की किसी ना किसी रूप में मदद करने के लिए आगे आये उन्हें एक समूह में गठित कर विधिवत कार्ययोजना बना कर राहत कार्य संपादित किया गया।इस समूह का गठन जिले की कोविड प्रभारी के रूप में दिनरात कमर कसे प्रदेश की काबीना मंत्री यशोधराराजे सिंधिया के दिशा निर्देशों के तहत जिलाधिकारी अक्षय कुमार सिंह की देखरेख में किया गया। ग्रुप से जुड़े तमाम युवाओं और मीडिया ,समाजसेवियों ने महामारी के आपातकाल में शासन-प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अभूतपूर्व सहयोग किया। लेकिन वॉरियर्स और वॉलेंटियर्स के सम्मान समारोह को लेकर मची घमासान ने एक बार फिर साबित किया कि फ़र्जी और षड्यंत्रकारियों की पहुंच से बचना मुश्किल ही नही असम्भव है।दरअसल पिछले दिनों खेलमंत्री यशोधराराजे सिंधिया के नगरागमन के दौरान वॉलेंटियर्स के सम्मान में एक आयोजन रखा गया।कार्यक्रम में खेलमंत्री सिंधिया ने उपस्थित सभी वॉलेंटियर्स को सम्मानित किया। किंतु कार्यक्रम के बाद वॉलेंटियर्स द्वारा काटे गए बवाल ने अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न कर दी।मामला तब उठा जब वरिष्ठ पत्रकार अशोक अग्रवाल ने वॉलेंटियर्स के व्हाट्सएप ग्रुप में सम्मान समारोह की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कोविड महामारी में बेजोड़ कार्य कर चर्चाओं में आये रानू रघुवंशी और पूर्व पार्षद आकाश शर्मा सहित दर्जनों वॉलेंटियर्स के नाम गिना दिए जिन्हें सम्मान समारोह में आमंत्रित तक नही किया गया।देखते ही देखते चर्चा गर्मी पकड़ गई और कई वॉलेंटियर्स ने ग्रुप में सामने आ कर आयोजक मंडल में शामिल एक तथाकथित पत्रकार और एक नगरपालिका के ठेकेदार नेता की नीयत पर ही ढेरों सवाल खड़े कर दिए। किसी ने आयोजकों को शासन-प्रशासन का दलाल तक कह डाला तो किसी ने वॉलेंटियर्स का ठेकेदार। एक मीडियाकर्मी ने तो आयोजकों द्वारा ज़िले में चलाई जा रहीं गतिविधियों के फर्जीवाड़े की पोल खोलने की चुनौती दे डाली।स्थिति उस समय अत्यंत गंभीर हो गई जब आयोजक मंडल के एक अहम सदस्य समीर गांधी ने सफाई देते हुए यह तक लिख डाला कि वे तो कभी हॉस्पिटल या मेडीकल कॉलेज में गए ही नही,उन्हें तो जो नाम दिए गए उन्होंने ने वे ही आमंत्रित किये थे। बखेड़ा खड़ा हुआ तो ग्रुप से कलेक्टर सहित कई अहम सदस्य लेफ्ट कर गए और इस तरह से एक अतुलनीय कार्य सत्ता के दलालों की काली परछाईं से नही बच पाया

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