टैंकर घोटाले के आरोपियों पर लटकी सेवा समाप्ति की तलवार / Shivpuri News

शिवपुरी- नगरपालिका परिषद शिवपुरी के बहुचर्चित टैंकर घोटाले में फंसे  लगभग आधा दर्जन सब इंजीनियर्स और एई पर अब सेवा समाप्ति की तलवार लटक रही है। ख़बर है कि मामले की जांच कर रहे लोकायुक्त अधिकारी द्वारा  पत्र लिखकर कथित आरोपियों  की सेवा संबंधी विषयक जानकारी मांगी है। मामले के जांचकर्ता अधिकारी प्रद्दुम्न पाराशर उप पुलिस अधीक्षक,वि.पु.स्था. लोकायुक्त संभाग ग्वालियर द्वारा 5 जनवरी को मुख्य नगरपालिकाI अधिकारी शिवपुरी को प्रेषित एक पत्र क्र 96/वि.पु.स्था/2021 में मामले में प्रथम दृष्टया संलिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों के नामों के विषय में 13 बिंदुओं के तहत  जानकारी तलब की गई है। मांगी गई जानकारी में संबंधित अधिकारी /कर्मचारी के सेवा पुस्तिका से लेकर सेवा समाप्ति करने वाले सक्षम अधिकारी के विषय मे भी जानकारी चाही गई है।

यह था मामला

वर्ष 2014-15 व 2015-16 में शिवपुरी नगरपालिका परिषद द्वारा शहर के 39 वॉर्ड में ठेकेदार विकास शर्मा के माध्यम से  टैंकरों से पानी सप्लाई कराया गया था।शहर को चार जॉन में बांटकर ,नपा के इंजीनियर एस के मिश्रा,सुनील पाण्डे,के एम गुप्ता और आरडी शर्मा को प्रभारी बना कर इन चारों जॉन का प्रभारी सहायक यंत्री पी एस कुशवाह को बनाया गया था। किन्तु शहर के प्यासे कंठों को राहत पहुँचाने वाली इस अतिसंवेदनशील योजना को भी सरकारी तंत्र के दानवों ने नही बख्शा और जल-वितरण का यह कार्य भरपूर अनियमितताओं की भेंट चढ़ गया। टैंकरों को जहां प्रतिदिन 6-8चक्कर लगा कर ,हाईडेंट रिकॉर्ड मेंटेन करना था,वॉर्ड वासियों-पार्षदों से सत्यापन कराना था,लॉगबुक मेंटेन करनी थी,इंजीनियर को मौका मुआयना करना था,टैंकर व चालक के कागजातों की जांच की जानी थी ,किंतु इनमें से कोई भी कार्य नियमित तरीके से नही किया गया।

कोर्ट ने कहा था लोकायुक्त में शिकायत करो

शहर के एक आम नागरिक रामचंद्र बाथम ने इसकी शिकायत की तो कोई सुनवाई नही हुई। रामचन्द्र ने 2018 में यह मामला न्यायालय में पेश किया। न्यायालय द्वारा रामचन्द्र को लोकायुक्त में शिकायत करने को कहा ।इस पर रामचन्द्र ने उक्त घोटाले की शिकायत लोकायुक्त में की। लोकायुक्त ने जांच इंस्पेक्टर कवींद्र चौहान को सुपुर्द की। मामले की प्राथमिक जांच में इंजीनियर, ठेकेदार व लेखापाल आदि पर प्रकरण दर्ज किया गया है।


पर्दा उठा तो कई सफेदपोश होंगे बेनकाब


सिर्फ इंजीनियर और ठेकेदार पर एफआईआर की कार्यवाही से पूर्ण न्याय होना अभी शेष है। यक्ष प्रश्न है कि पूरे मामले में बार बार मीडिया व जिम्मेदार आम नागरिकों द्वारा चेताये जाने के बावज़ूद तत्कालीन अध्यक्ष व मुख्य नगरपालिका अधिकारी बेगुनाह कैसे हो गए..?खबर है कि जैसे जैसे जांच आगे बढ़ेगी सफेदपोशों के चेहरों से भी नकाब भी उतरते जाएंगे। जिन गुनाहगार चेहरों ने अभी तक अपने आप को पर्दे के पीछे छुपा रखा है वे सब भी बेपर्दा होंगे।

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