मामला कैदी की मौत का : जिसका मरता उसका ही रोता हैं / Shivpuri News

 ऊपर बाले से डरो साहब, इसी जन्म में मिलता हैं कर्मों का हिसाब 

 

सुनील रजक की कलम से

 

शिवपुरी। ये कोई खबर हैं या नहीं इससे मतलब नहीं हैं लेकिन यहाँ इंसानियत की बात हैं ,पहले जानते हैं पूरा मामला शनिवार की रात्रि चैकिंग के दौरान नरवर थाना के अंतर्गत मगरौनी चौकी पर एक रेनॉल्ट कार में सवार चार लोगों को गिरफ्तार किया था, चारों लोगों पर आरोप थे कि ये लोग स्मैक बेचने के मकसद से निकले थे, जिनसे 6 ग्राम स्मैक सहित देश कट्टा जप्त किया गया था। रविवार को इनके विरुद्ध एफआईआर कर दी गई। सोमवार को इन्हें न्यायलय करैरा ने पेश किया गया। 

 

इसके बाद इनकी जमानत खारिज कर दी गई थी जिसके बाद इन्हें शिवपुरी सर्किल जेल भेज दिया, चारों लोगों में से लोकेंद्र गिरी की अचनाक तवियत बिगड़ी जिसके बाद लोकेंद्र को कल बुधवार को सर्किल जेल से जिला चिकित्सालय सुबह 10 बजे के आसपास भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने लोकेंद्र का इलाज किया। लेकिन रात्रि 8 बजे के आसपास लोकेंद्र की मौत हो गई इस पूरे मामले में प्रशासन द्वारा परिजनों को सूचना क्यों नही दी गई, सवाल ये खड़ा होता हैं, हद तो तब हो गई जब रात्रि को 10 बजे परिजनों को सोशल मीडिया के माध्यम से लोकेंद्र की खबर मिली, जिसके बाद रात्रि 3 बजे साडोरा जिला गुना से लोकेन्द्र के परिजन शिवपुरी पहुंचें और रात गुजारने के बाद सुबह अस्पताल एवं पीएम हाउस पहुंचे लेकिन फिर भी परिजनों को प्रशासन ने सूचना नहीं दी। 

 

इंतजार की हुई इम्तेहा 1 बजे लोकेंद्र का शब पीएम कराने के बाद परिजनों को सौंपा गया। उधर परिजनों का हाल बेहाल था, इधर प्रशासन के अधिकारी अपनी रात चैन से गुजार रहे थे और उधर लोकेन्द्र के परिजन आंसुओं में रात्रि गुजार रहे थे।


परिजनों का आरोप: अगर जिला चिकित्सालय में भर्ती की सूचना हमें मिल जाती तो हम लोकेन्द्र का अच्छे से इलाज करा लेते शायद हो सकता हैं बेहतर इलाज न मिलने के चलते लोकेन्द्र की मौत हो गई हो, लोकेन्द्र के पिता अपनी आंखों में आंशू लेकर बोलें की काश हम अंतिम क्षणों में अपने बेटे से मिल पाते, आज के जमाने मे मुझे अपने बेटे से अंतिम समय भी नहीं मिला, लोकेन्द्र मेरा इकलौता बेटा था, लोकेंद्र के 2 छोटे छोटे बच्चे हैं। अब ऐसे में हम कैसे क्या करेंगे, अब हमारा बचा ही कौन हैं, प्रशासन ने हमें जानकारी क्यों नहीं दी आखिर क्या वजह रहीं इसकी? कौन परिवार होगा ऐसा जिसको अपने इकलौते बेटे की मौत के अंतिम क्षणों में भी उसे देखने का मिलने का सौभाग्य नहीं होगा। हमारी बस यहीं इच्छा हैं कि निष्पक्ष जाँच कराकर हमें न्याय मिलें जो भी लोग लोकेंद्र की मौत के जिम्मेदार हैं उन्हें सजा मिलें।



एक तरफ अस्पताल से सोशल मीडिया पर एक मामला सामने आया हैं कि लोकेन्द्र को जिला चिकित्सालय से ग्वालियर रैफर किया गया था ,तो ग्वालियर क्यों नहीं भेजा गया ,इस पूरे मामले में परिजनों को कोई सूचना दी नहीं गई थी, तो परिजनों का होना तो तय था ही नहीं, फिर प्रशासन ने लोकेन्द्र को ग्वालियर क्यों नहीं भेजा, परिजनों का भी यहीं कहना हैं कि अगर हम होते तो ले जाते या बेहतर उपचार देते, लेकिन हमे तो कोई खबर ही नहीं थी कि ऐसा हो गया हैं।

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