लंच हो या डिनर एक टाइम जरूर करें दाल का सेवन:- रवि गोयल / Shivpuri News

विश्व दलहन दिवस पर अनिमिया से ग्रसित किशोरी बालिकाओं को जागरुक किया

दाल वसा में कम और फाइबर से भरपूर होती हैं। जो कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर दोनों के लेवल को कंट्रोल में रखती हैं:- सुपोषण सखी  नीलम प्रजापति 

 
शिवपुरी । दाल एक ऐसी चीज़ है जिससे हमारी बॉडी को जरूरी मात्रा में न्यूट्रिशन मिलते हैं इसलिए इन्हें रोज़ाना की डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। आज विश्व दलहन दिवस पर खून की कमी से ग्रसित किशोरी बालिकाओं के लिए जागता कार्यक्रम का आयोजन शक्तिशाली महिला संगठन शिवपुरी द्वारा मदकपुरा आंगनवाड़ी केंद्र पर किया। सुपोषण सखी श्रीमती नीलम प्रजापति ने बताया कि दाल भारतीय खानपान का बहुत ही जरूरी हिस्सा होती हैं जिनमें अच्छी.खासी मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं उनमें भी सबसे ज्यादा प्रोटीन। कह सकते हैं कि ये वेजिटेरियन्स के लिए बहुत ही अच्छा और सस्ता ऑप्शन है। दाल वसा में कम और फाइबर से भरपूर होती हैं। जो कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर दोनों के लेवल को कंट्रोल में रखती हैं। आज मदकपुरा आंगनवाड़ी केन्द्र पर विश्व दाल दिवस के उपलक्ष्य में शक्तिशाली महिला संगठन शिवपुरी ने खून की कमी एवं अनिमिया से ग्रसित किशोरी बालिकाओं एवं गर्भवती माताओं का वजन लिया एवं उनको अपने दैनिक आहार में किस प्रकार दालों को शामिल करना चाहिए एंव अपना स्वास्थ अच्छा करना चाहिए इसके लिए विभिन्न प्रकार की दालों के उदाहरण देकर बालिकाओं को जागरूक किया । कार्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी देते हुए कार्यक्रम संयोजक शक्तिशाली महिला संगठन के रवि गोयल ने बताया कि हर साल दुनियाभर में 10 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस यानी वर्ल्ड पल्स डे  मनाया जाता है। दालों का सेवन हमारे लिए कितना जरूरी है ये बताने और लोगों को दालों के महत्व से रूबरू कराने के लिए साल 2016 को अंतर्राष्ट्रीय दालों का वर्ष घोषित किया गया था। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 फरवरी को विश्व दाल दिवस के रूप में मनाने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। तब से 10 फरवरी के दिन को अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।  आज की भागदौड़ एंव फास्ट फूड की दौड़ में खान पान में इतना बदलाब आया है कि हम अपनी परम्परागत खान पान की पद्धति को भूलते जा रहे है आज मदकपुरा आंगनवाड़ी केन्द्र पर विश्व दलहन दिवस पर जब किशोरी बालिकाओ से दैनिक आहार एवं डाईट के बारे में पूछा गया तो अधिकांश बालिकाओं ने दाल का प्रयोग कभी कभार करते है बताया जबकि  दलहन को फलियां भी कहा जाता है। ये भोजन के लिए सुपाच्य होने वाली पौधों के खाद्य बीज हैं। जिसमें चने, सूखी फलियां, अरहर, मसूर, सूखी मटर और अन्य प्रकार की दालें शामिल हैं। दुनियाभर के दालों का काफी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है। दलहन न सिर्फ बीज मात्र हैं बल्कि ये न्यूट्रिशन का खजाना भी है। दलहनी फसलों में वे फसलें शामिल नहीं हैंए जिनके हरे पौधे जैसे हरी मटरए हरी फलियां काट लिए जाते हैं। इसके अलावा जिन फसलों को मुख्य रूप से तेल के उत्पादन में प्रयोग किया जाता हैए उन्हें दलहन की कैटेगरी में रखा जाता है।  इसलिए दालों को भोजन का एक महत्वपूर्ण अंग माना गया है। बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए इसके अनेकों फायदे हैं। यहां तक कि बीमार लोगों को भी दाल की खिचड़ी खाने की सलाह दी जाती है। तो लंच हो या डिनर एक टाइम जरूर करें इसका सेवन। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती रजनी वर्मा ने गर्भवती माताओ को दालों का प्रयोग नियमित करने की सलाह दी वं कहा कि दालों से हमको प्रोटीन मिलता है जो कि हमारे शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक है कार्यक्रम में शक्तिशाली महिला संगठन के रवि गोयल एवं उनकी पूरी टीम, सुपोषण सखी श्रीमती नीलम प्रजापति,आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती रजनी वर्मा, आंनगवाड़ी सहायिका सुश्री राधा यादव,  किशोरी बालिकाओं में कुमारी रजनी ,रुपा, संध्या, सोनाली, अफरीना, कविता, मुस्कान, खुशबू, भावना पाल, काजल , मोनिका, सोनम आदि मुख्य रुप से उपस्थित थी ।

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