पॉलिटेक्निक प्राचार्य आर एस पंथ के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं को लेकर हुई विभागीय जांच / Shivpuri News

शिवपुरी। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत 11 सालों से प्रभारी प्राचार्य रहे आर एस पंथ के खिलाफ तकनीकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने वित्तीय अनियमिताओं एवं किए भ्रष्टाचार को लेकर जांच अधिकारियों की एक टीम पॉलीटेक्निक शिवपुरी शुक्रवार 8 जनवरी को विभागीय जांच अधिकारी प्राचार्य डॉ. भीमराव अम्बेडकर पॉलीटेक्निक ग्वालियर, शशि विकसित के नेतृव में पहुंची।

जांच के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों से भी हुई पूछताछ:- जांच अधिकारियों के दल ने पिछले 5 सालो में संस्था में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से जिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को रखा गया एवम् कुछ आर्थिक तंगी अथवा कम वेतन दिए जाने एवम् प्रभारी प्राचार्य के द्वारा आर्थिक शोषण के कारण छोड़कर चले गए उन सभी को बुलाया गया चतुर्थश्रेणी कर्मचारियों में नरेश निगम, राहुल पवार, देवकिशन जाटव, सुमिरन जाटव, रिंकू जाटव, गंभीर गुर्जर, राजा यादव आदि से की गई पूछताछ।
प्रभारी प्राचार्य ने शासन के निर्देशानसार नहीं दिया भुगतान:- सूत्रों के हवाले से पता चला है कि प्रभारी प्राचार्य आर एस पंथ ने जिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम रखा था न तो उनको कलेक्टर रेट के अनुसार भुगतान दिया और न किसी भी प्रकार के एपीफ के साथ, उनका भुगतान भी खाते अथवा चेक के माध्यम से न कर नगद भुगतान वह भी मात्र 3000/- दिया जाता था। और शासन द्वारा स्वीकृत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के स्थान पर केवल 4 को ही काम पर रखा जाता था और शेष भुगतान फर्जी बिलों के माध्यम से एजेंसी संचालक और प्रभारी प्राचार्य द्वारा किया जाता था।

महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं शैक्षणिक कर्मचारियों से भी लिए कथन :- नाम न बताने की शर्त पर महाविद्यालय के एक कर्मचारी द्वारा बताया कि जांच अधिकारी शशि विकसित के द्वारा आलग - अलग बंद कमरे में पुछताक्ष की व्याख्याता और अतिथि व्याख्याताओं के लिखित रूप से कथन लिए गए, अधिकतर कर्मचारी ना खुश पाए गए और प्रभारी प्राचार्य आर एस पंथ के कार्यशैली एवं व्यवहार से भी असंतुष्ट थे क्यों की महाविद्यालय परिसर में आए दिन कर्मचारियों के वेतन को लेकर लड़ाई झगडे और पुलिस प्रशासन की बार बार आवागमन के साथ गैर संस्थागत अपराधिक प्रवृति के असामाजिक तत्वों का कॉलेज में अनाधिकृत प्रवेश से संस्था की छवि खराब कर, प्राचार्य द्वारा प्रोत्साहन दिया जाता है। और कर्मचारियों को प्रगति वार्षिक रिपोर्ट खराब करने की धमकी देकर प्रभारी प्राचार्य द्वारा जबरदस्ती हस्ताक्षर कराने का बबाव बनाकर महिला कर्मचारियों को मानसिक, भावनात्मक  रूप से  प्रताड़ित किया जाता है।

प्रभारी प्राचार्य का निवास भी मिला कॉलेज में:- जांच अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान महाविद्यालय परिसर में 10 वर्षों से रहकर शासन के नियमो का दुरुपयोग कर आवास भत्ता, यात्रा भुगतान एवम् अन्य सेवाएं भी अनैतिक रूप से लेकर प्रभारी प्राचार्य को महाविद्यालय प्रांगण में रहते हुए पाया गया, जिसकी शिकायत भी पूर्व में जिला अधिकारियों से की जा चुकी है।

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