वन क्षेत्र में हो रहे अवैध उत्खनन से अब वन पक्षी पर मंडराने लगा है खतरा / Shivpuri News

सरेआम अवैध उत्खनन के बाद भी वन विभाग की कार्यवाही नहीं होना कहीं साईलेंट पार्टनरशिप तो नहीं!


सुनील रजक शिवपुरी / एक ओर जहां वन विभाग अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए शासन के नियमों का उल्लंघन कर वन क्षेत्र में अवैध उत्खनन को बढ़ावा दे रहा है तो दूसरी ओर वन सीमा में अवैध उत्खनन के कारण अब वन पक्षीयों के जीवन पर भी खतरा मंडराने लगा है। सूत्रों के अनुसार कारण साफ है कि जब वन सीमा में खनन होगा तब निश्चित ही यहां विचरण करने वाले पशु-पक्षियों पर इनके शोर का असर पड़ेगा और कभी-कभार तो वन में अवैध खनन के यह माफिया वन्य प्राणियों का शिकार तक करने से गुरेज नहीं करते। ऐस में वन क्षेत्र में होने वाले अवैध उत्खनन को बढ़ावा देना कहीं ना कहीं वन विभाग की साईलेंट पार्टनरशिप को उजागर करता हुआ नजर आ रहा है अन्यथा वन सीमा में होने वाले अवैध उत्खनन पर कभी तक रोक लग सकती थी। सूत्रों पर भरोसा करें तो कहीं ना कहीं वन अमला स्वयं भी इस अवैध उत्खनन का संरक्षण बन हिमायती बना हुआ है क्योंकि इस खनन से जहां पुलिस और वन विभाग आपस में सांठगांठ कर बारे-न्यारे करने में लगे हुए है तो कार्यवाही करने की आवश्यकता ही क्या है। सूत्रो ने तो यहां तक बताया है कि खनन माफियाओं के द्वारा वन सीमा में अवैध उत्खनन को बढ़ावा देकर अपनी जेबें भरने का काम किया जा रहा है जिसके बदले में खनन माफिया जहां उत्खनन कर रहे है तो वहीं दूसरी ओर वन सीमा के वन्य प्राणियों का शिकार भी यहां अब खुलेआम होने लगा है। कई वन्य प्राणी जंगल के इन वनों में विचरण करते है लेकिन यहां खनन माफिया खनन की आड़ में इन वन्य प्राणियों का शिकार कर अपने मांसाहारी शौक को भी पूरा करते हुए नजर जा रहे है। रही बात पुलिस और वन अमले को लेकर कार्यवाही की तो यहां न तो कोई गश्त होती और ना ही चैकिंग जिसके चलते खनन माफियाओं के वाहनों को आसानी से वन सीमा से बाहर और अंदर तक आने-जाने की खुली अनुमति जान पड़ती है। सूत्रों ने बताया है कि खनन माफियाओं द्वारा पूरे मामले को नोटों के जरिए सेट कर लिया गया है जिसमें खनन के द्वारा होने वाले दोहन के रूप में एकत्रित राशि का कुछ हिस्सा पुलिस और वन अमले को दिया जा रहा है जिसके चलते वीरान जंगलों में आसानी से खनन हो जाता है और उसे जंगल सीमा से बाहर आने और व्यापार करने के रूप में भी कई वन्यकर्मी अपनी-अपनी राशि लेकर इस तरह के खुले संरक्षण को खूब तरजीह देने में लगे हुए है। अक्सर देर सायं को होने वाले बंटवारे के रूप में कई वन्यकर्मी अपने वेतन के अतिरिक्त आमदनी इसी तरह के खनन माफियाओं से सांठगांठ कर जमाने में लगे है क्योंकि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तो मासिक रूप से तय होकर अपना काम कर रहे है वहीं कुछेक छोटे कर्मचारी वन सीमा के अंदर प्रवेश और बाहर करने को लेकर प्रतिदिन या साप्ताहिक रूप से अपनी आमदनी इन खनन माफियाओं के सहारे ही जुटाने में लगे हुए है।
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