ग्वालियर: शहरवासियों की जान से खिलवाड़ करतीं ऑयल कंपनियाँ / Gwalior News


ग्वालियर.  जिले के आधे पेट्रोल पंप बिना फायर एनओसी के चलाए जा रहे हैं। इनमें से कुछ पेट्रोल पंप इतनी खतरनाक स्थिति में हैं कि कभी भी कोई भी हादसा यहाँ हो सकता है। पेट्रोलियम कंपनियों को केवल अपने लाभ से मतलब है लेकिन नागरिकों की सुरक्षा की तरफ ध्यान न कंपनियों का है और न ही जिला प्रशासन या नगर निगम का । स्वतंत्र समय संवाददाता द्वारा एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है।
आपको बता दें कि 2018 के पहले नगर निगम के अंतर्गत आने वाला फायर ब्रिगेड पूरी तरह निरीक्षण करने के बाद इन पेट्रोल पंपो को एनओसी जारी करता था। किन्तु अब यही एनओसी भारत सरकार द्वारा जारी की जाती है और शहर के पेट्रोल पंप डीलरों के मुताबिक इस एनओसी को संबंधित ऑयल कंपनी अपने डीलर के लिए जारी करवाती है वहीं राज्य सरकार फायर विभाग द्वारा निरीक्षण करके पेट्रोल पंप को एनओसी जारी करते हैं। लेकिन अब शहर में 80 प्रतिशत से ज्यादा पेट्रोल पंप ऐसे हैं जो फायर एनओसी के नियमों को फॉलो नहीं कर रहे।हैं वहीं 80 प्रतिशत पेट्रोल पंपों पर फायर की एनओसी भी नहीं है। बात यहीं तक सीमित नहीं है अधिकतर पेट्रोल पम्पों पर नागरिकों के लिए आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव यहाँ देखने की मिलता और बहोड़ापुर रोड पर बना पुलिस पेट्रोल पंप जिसका संचालन ग्वालियर पुलिस द्वारा होता है वहाँ गाड़ियों में हवा भरने का पम्प काफी सालों से खराब पड़ा है। फूलबाग चौराहे पर स्थित पेट्रोल पंप पर बाथरूम या पानी के टैंक की सुविधा नहीं है जिससे कोई भी घटना होने की स्थिति में फायर ब्रिगेड का इंतजार बड़े हादसे को जन्म दे सकता है हमारी रिपोर्ट में किसी भी पेट्रोल पंप पर पूरी सुविधाएं या बचाव के साधन नहीं पाए गए है। पिछले एक वर्ष में ग्वालियर में ही आगजनी के बड़े हादसे हो चुके हैं जिनमें लोगों की जानें गईं हैं। निगम उपायुक्त अतिबल सिंह यादव के मुताबिक हर पेट्रोल पंप पर न्यूनतम दस हजार लीटर पानी का ओवरहैड टैंक होना आवश्यक है,
यहाँ ये भी बताना जरूरी है कि अधिकतर पेट्रोल पम्प घनी आबादी के बीच स्थित हैं वहीं कुछ पेट्रोल पंप स्कूल कॉलेज के आसपास निर्मित हैं। अब यदि ऑयल कंपनियों की बात करें तो वे अपनी आमदनी और बिक्री के हिसाब से पेट्रोल पंप का आवंटन करती हैं लेकिन इस सबमें बड़ी लापरवाही सीधे तौर पर जिला प्रशासन और नगर निगम की दिखाई दे रही है क्योंकि फायर ब्रिगेड नगर निगम के अंतर्गत आता है।
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