ग्वालियर: पानीपत युद्ध की जयंती पर मराठा समाज ने मनाया शौर्य दिवस / Gwalior News


ग्वालियर।14.01.2021 / ग्वालियर 14 जनवरी मकर संक्रांति के साथ साथ एक और महत्वपूर्ण दिन भी है। आज ही के दिन पानीपत के युद्ध में मराठों ने दुर्दांत अहमद शाह अब्दाली से युद्ध किया था। मराठा समाज आज के दिन को शौर्य दिवस के रूप में मनाता है। आज ग्वालियर में मराठा समाज ने अचलेश्वर चौराहे स्थित महादजी की छतरी पर माल्यार्पण किया और महादजी सिंधिया के शौर्य व बलिदान को याद किया।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में इंद्रजीत शिंदे और नितिन वालिम्बे उपस्थित रहे। 

पानीपत के तृतीया युद्ध मे उदगीर से चल कर मराठा सेना उत्तर की ओर कूच कर चुकी थी बाहरी आक्रान्ता अहमद शाह अब्दाली द्वारा भारत पर हमला किये जाने पर उत्तर भारत मे प्रवेश करने पर चम्बल नदी पार करने से पहले मराठा सेना का पड़ाव ग्वालियर मे हुआ जिसके कारण आज का पड़ाव पुल का जो क्षेत्र है उसका नाम हुआ पड़ाव।
पानीपत युद्ध कि सेना का प्रमुख निर्धारण उत्तर भारत कि खगोलिया एवं राजनीतिक स्तिथि को समज़हने वाले मराठा जो दत्ताजी शिंदे (सिंधिया)के साथ ही ग्वालियर मे पहुँच चुके थे उनमे से थे ग्वालियर के हर एक मराठा के पूर्वज जो के ग्वालियर के प्रमुख सरदारों के साथ यहीं पानपत्ते  की गोठ है जिसका प्रमुख नाम था पानीपत की गोठ। यहां से आगे के कुछ लश्कर कहलाया क्योंकि यही पर सेना रुकी थी।इसी प्रकार यहाँ शिन्दे कि छावनी है जो कि उसी समय से प्रचलित नाम है जब सेना ने यहां छावनी डाली थी। 

पानीपत के तृतीय युद्ध को 260 साल हो चुके हैं। लेकिन सेंकडो किलोमीटर की यात्रा के बाद विषम परिस्थितियों में भी मराठा सेना ने अब्दाली के सामने घुटने नहीं टेके बल्कि लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हुए। उसी सेना ने महादजी सिंधिया के नेतृत्व में ग्वालियर को अपनी राजधानी बनाया। इसलिए ग्वालियर में ऐसे कई मराठा परिवार आज भी रहते हैं जिनके पूर्वजों ने पानीपत युद्ध मे देश के लिए बलिदान दिया। शौर्य दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वसन्त सेलमकर, बाजी राव सुर्वे, अमर कुटे, गजेन्द्र इंगले, अनूप शिंदे गिरीश खटके, मनीष मगर, रोहित सालुंके सहित मराठा समाज के कई लोग उपस्थित रहे।
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