कॉलेज की करोड़ों की जमीन पर भू-कारोबारी की नजर, कब्जा शुरू / Karera News

पूर्व प्राचार्य डॉ. खरे ने जमीन को मुक्त कराने कई बार दिए आवेदन


46 लाख की लागत से हुई कॉलेज के ग्राउण्ड की बाउंड्री


करैरा। करैरा नेशनल हाइवे स्थित शासकीय महाविद्यालय की दस बीघा जमीन जो खेल मैदान के लिए स्वीकृत हुई थी। इस शासकीय जमीन पर भू-कारोबारियों की नजर पड गई और इस पर कब्जा भी हो गया। कॉलेज के प्राचार्य से लेकर जनप्रतिनिधि तक इसे मुक्त कराने के लिए जोर लगाते रहेए लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। इसका परिणाम यह हुआ कि तीन से चार बीघा जमीन पर माफिया ने प्लॉट काटकर बेच दिए। अब जो बची हुई भूमि है जिसे बाउंड्रीवॉल कराकर सुरक्षित करने का प्रयास किया गया थाए उस पर भी माफियाओं की नजर पड गई है। 9 फरवरी 2018 को 46 लाख 74 हजार की लागत से बॉउंड्री पीडब्लूडी विभाग द्वारा बनाई गई। ाजब कॉलेज के खेल मैदान की बॉउंड्री बॉल हो रही थी उस समय कॉलेज प्रबंधन ने कई आवेदन करैरा के प्रशासनिक अधिकारियोंए तहसीलदार और पटवारी को दिए। इसके बाद भी इसका सीमांकन नहीं कराया गया। सीमांकन नहीं होने से बची हुई जमीन पर कब्जा होने की आशंका बनी हुई है। पूर्व में प्रशासनिक अधिकारियों ने भूमाफिया के साथ मिलकर कॉलेज की जमीन के सर्वे नंबरों को निजी नंबर दर्शाकर उनका डायवर्शन तक करा दिया गया था। इस पर आलीशान बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है।


कॉलेज की बिल्डिंग को दान दी थी एक बीघा जमीन


करैरा का शासकीय महाविद्यालय को करैरा निवासी वृंदावन विश्वकर्मा ने एक बीघा जमीन दान में थी और कॉलेज 2 बीघा में बन गया। वहीं बिल्डिंग से लगी हुई 10 बीघा की शासकीय जमीन को कॉलेज के खेल मैदान के लिए आवंटित किाय गया था। इस पर प्लॉट काटकर भूमाफिया द्वारा बेच दिया गया है। जमीन खरीदने वालों को कॉलेज की जमीन पर कब्जा दिलाया और सर्वे नंबर कहीं ओर का दर्शा दिया।


पूर्व विधायक दो बार विधानसभा में उठा चुकी हैं मुद्दा


करैरा की पूर्व विधायक शकुंतला खटीक द्वारा विधानसभा में दो बारा इस पर प्रश्नकाल में सवाल पूछा जा चुका है। इसके बाद से कॉलेज के सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. एलएल खरे इसे लेकर काफी सक्रिय रहे। डॉ. खरे ने रणवीरसिंह रावत को इसके लिए ज्ञापन भी सौंपा। इसके बाद जनप्रतिनिधियों के प्रयास से बची हुई जमीन पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया गया और इसे अतिक्रमण से बचाया गया।


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