वृंदावन शर्मा आत्महत्या कांड: डीईओ व तीन बाबू पर कार्रवाई न होने से परेशान परिजनों ने राज्यपाल व कलेक्टर से की आत्मदाह की मांग / Shivpuri News


शिवपुरी। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के निलंबित बाबू वृंदावन शर्मा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मामले में सुसाइड नोट के आधार पर देहात थाना पुलिस ने तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी अजय कटियार सहित तीन बाबुओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन चारों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से नाराज परिजनों ने राज्यपाल व कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा और इस ज्ञापन में आत्मदाह की मांग की। 

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में लेखापाल के पद पर कार्यरत रहे वृंदावन शर्मा ने करीब तीन महीने पहले बांकड़े हनुमान मंदिर के पास जंगल में एक पेेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी और चार पेज का सोसाइट नोट भी छोड़ा था जिसमें तत्कालीन डीईओ अजय कटियार, बाबू प्रशांत गुप्ता, सचिन अग्रवाल पर प्रताड़ना व भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे औेर अपनी मौत के लिए इन तीनों को जिम्मेदार बताया था। इस मामले मेें परिजनों के बयान के आधार पर एक अन्य बाबू नरेंद्र सेंगर पर भी बाद में एफआईआर दर्ज कर गई थी। लेकिन इस सनसनीखेज आत्महत्याकांड के तीन महीने बाद भी आरोेपियों की गिरफ्तारी न होने से परिजनों का सब्र जबाव दे रहा है। मृतक की पत्नी ने करीब महीने भर पूर्व हाईकोर्ट द्वारा आरोपितों की जमानत याचिका खारिज करने व कार्रवाई को लेेकर करीब 13 पेज के उस निर्णय को भी दिखाया जिसमें तत्काल कार्रवाई के लिए हाईकोर्ट ने एसपी को लिखा था। बावजूद इसके अब तक गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार बेहद दुखी है। 


खुलेआम घूम रहे हैं आरोपित, नौकरी भी कर रहे हैं


इस मामले में मृतक के भाई नीरज व पत्नी पुष्पा शर्मा ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मामले में नामजद आरोपित तत्कालीन डीईओ कटियार और तीनों आरोपित बाबू खुलेआम घूम रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दोेनों बाबू करैरा व पिछोर में नौकरी कर रहे हैं तो डीईओ कटियार ग्वालियर में। जबकि इन फरार आरोपितों की न केवल गिरफ्तारी होना चाहिए बल्कि तत्काल उन्हें निलंबित भी किया जाना चाहिए। मामले कोेेेे लेकर परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई व नियत पर भी सवाल खड़े किए हैं। 

महीनेभर पहले कोर्ट ने खारिज कर दी थी जमानते

घटना के बाद से ही चारों आरोेपित फरार चल रहे हैं और अग्रिम जमानत के लिए बाबू सचिन अग्रवाल व तत्कालीन डीईओ अजय कटियार ने पहले जिला कोर्ट में याचिका लगाई थी, लेकिन यहां से खारिज हो गई थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली, लेकिन हाईकोर्ट ने भी करीब महीने भर पहले आरोेपितों की जमानत याचिका न केवल खारिज कर दी बल्कि 13 पेज का एक आदेश भी जारी किया था जिसमें कोर्ट ने शिवपुरी एसपी को निर्देश दिए थे कि वे एक महीने में मामले कोे लेकर हैंड राइटिंग रिपोर्ट व मृतक को प्रताड़ित करने संबंधी सौंपी गई रिकॉर्डिंग की पेन ड्राइव की जांच व कार्रवाई का प्रतिवेदन मांगा था। कोर्ट ने मामले में जांच अधिकारी देहात थाना प्रभारी सुनील खेमरिया की कार्यप्रणाली को भी लापरवाहीपूर्ण बताते हुए थाना प्रभारी पर कार्रवाई के लिए इस आदेश में लिखा था, लेेकिन अब तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। इधर मृतक के सेवाकाल संबंधी देयकों व पेंशन का भुगतान अब तक न किए जाने के आरोप भी परिजनों ने लगाए हैं।
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