मंदिर सूनसान, मस्जिदें वीरान, गुरुद्वारे और चर्च हो गये बेजुबान, सबका है चक्काजाम | Shivpuri News

राष्ट्रीय साहित्य वाटिका का ऑनलाइन ऑडियो कवि सम्मेलन आयोजित
शिवपुरी। राष्ट्रीय साहित्य वाटिका का ऑनलाइन ऑडियो कवि सम्मेलन का आयोजन बीते रोज किया गया। यह आयोजन संस्था के संस्थापक राकेश मिश्रा, संरक्षक राम पंडित व अध्यख विकास शुल्क प्रचंड के संयोजन में आयोजित किया गया। 
कार्यक्रम का संचालन कर रहे बस्ती, उत्तर प्रदेश से वीर रस के कवि मृदुल कुमार ओझा ने सर्वप्रथम मां सरस्वती वंदना के लिए अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश से उपस्थित, ओज कवि, सर्वेश उपाध्याय 'सरस' को बुलाया।  काव्य पाठ के क्रम में आरती अक्षय गोस्वामी ने वीर रस की ओज पूर्ण रचना का काव्य पाठ किया - मुण्ड कटे रुण्ड लड़े, यह थाती है मेरे भारत की। अगले क्रम में नंदन मिश्र ने सुंदर संदेश देती हुआ काव्य पाठ किया हर रिश्ता अटूट हो, बंधन अटूट हो, जिंदगी में तो ऐसा प्यार होना चाहिए।
निधि जैन ने लॉकडाउन पर बेहतरीन रचना सुनाई- मंदिर सूनसान, मस्जिदें वीरान, गुरुद्वारे और चर्च हो गये बेजुबान, सबका है चक्काजाम। सर्वेश उपाध्याय 'सरस' ने 'सुभाष स्मृति' का ओजमय काव्य पाठ किया। उन्होंने कहा ढ़ूंढ़ता है देश वीरता भरी निशानियां, आज देश फिर से याद कर रहा सुभाष को ।
अगले क्रम में गरिमा ने अपनी रचना में गांव का सजीव चित्रण किया- दो अलबेली हैं वो नार, जो पानी लेवन चली। अगले कवि राकेश भटनागर ने ब्रज भाषा में भगवान श्रीकृष्ण जी की महिमा का गुणगान किया- बांके बिहारी की लीला कोऊ पार ना पायो, संकट में पड़े भक्तन को बेड़ा पार लगायो ।
अगले आमंत्रित कवि डीपी लहरे 'मौज' जी ने सुनाया- तोड़कर दिल को मेरा साथी अगर जाएगा, कांच के जैसा मेरा दिल ये बिखर जाएगा। अगले क्रम में खुशीराम वाजपेयी ने हिन्दी भाषा के सम्मान में सुंदर काव्य पाठ किया, पंक्तियां देखिए- मां हिन्दी उपकार आपका, कलमकार नित गाएगा, वंदन पूजन शब्दों से कर, शुचि सुगंध बिखराएगा। अगले क्रम में लखनऊ, उत्तर प्रदेश से कार्यक्रम में उपस्थित कवयित्री आभा सिंह ने सुनाया- मुझको मंजूर है शबरी जैसे राह निहारना, बस शर्त ये है कि कोई रघुवर जैसा जूठे बेर खाए। अंत मे आभार प्रदर्शन संस्था के अध्यक्ष विकास शुक्ल प्रचंड ने किया।
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