प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के साथ छल किया तो सरकार हो जाएगी बेरोजगार : डॉ रामजी दास राठौर | Shivpuri News


शिवपुरी। मध्यप्रदेश में पुलिस भर्ती के संबंध में इंदौर में युवाओं द्वारा माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने के लिए निवेदन किया गया तो वहां के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा युवाओं को जलील करते हुए अभद्र शब्दों का प्रयोग किया गया तथा माननीय मुख्यमंत्री से मिलाने के लिए युवाओं को मना किया गया जो काफी निंदनीय है.प्रदेश में योग्य बेरोजगार युवाओं का अपमान नहीं होना चाहिए. डॉ.रामजी दास राठौर (शिक्षाविद् एवं समाजसेवी)ने इस संबंध में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश में केवल पुलिस विभाग में जगह खाली नहीं है बल्कि मध्य प्रदेश में 27 विधायकों की पोस्ट भी खाली हैं, उन पर आप अपने आवेदन करें क्योंकि नौकरी मांगने वालों को तो हमेशा दुत्कार ही मिलती है.जब आप विधायक बन जाएंगे, तो आपको दुत्कार ने वाले अधिकारी भी आप को सैल्यूट करेंगे. वर्तमान परिस्थितियां युवाओं को सक्रिय रूप से राजनीति में आने का आह्वान करती हैं जिससे कि वह अपने भविष्य के निर्माता स्वयं बने. युवाओं को केवल नौकरी के सपने नहीं देखना चाहिए बल्कि उन्हें राजनैतिक महत्वाकांक्षा को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक रूप से अपनी सक्रियता दिखाते हुए एक बेहतर राजनेता बनने के बारे में भी विचार करना चाहिए. जिससे कि वह भविष्य में प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के साथ न्याय कर सकें.

सरकार किसी की भी रही हो बेरोजगार युवाओं के साथ हमेशा छल होता रहा है. मध्यप्रदेश में शायद ही ऐसा कोई विभाग हो जिसमें संविदा पर कर्मचारियों की नियुक्ति ना की गई हो. नियुक्ति को नाम कोई भी दिया गया हो लेकिन उसमें कार्यरत व्यक्ति का शोषण लगातार वर्षों से होता चला आ रहा है तथा इन पदों पर कार्य करते करते कई व्यक्ति काल कलवित चुके हैं तथा उनका परिवार विषम परिस्थितियों से संघर्ष कर रहा है.

सरकारों ने केवल वादे किए,चुनावी घोषणाएं की, विश्वास दिया लेकिन कभी भी बेरोजगार युवाओं को बेहतर भविष्य देने के बारे में सार्थक पहल नहीं की.
कई विभाग ऐसे हैं जहां वर्षों से पदों पर नियुक्तियां नहीं की गई हैं तथा जब पद स्वीकृत कर निकाले जाते हैं तो वह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं.इसका उदाहरण  मध्यप्रदेश का व्यापम घोटाला एवं सहायक प्राध्यापकों की भर्ती में हुआ घोटाला है. सहायक प्राध्यापकों की भर्ती में लगातार किए गए संशोधनों से स्पष्ट होता है कि चुनिंदा निश्चित व्यक्तियों को लाभ देने के लिए किसी भी तरह के परिवर्तन बार-बार किए जा सकते हैं तथा बेरोजगारों का शोषण किया जा सकता है.
प्रतिभावान, योग्य, युवा साथी अस्थाई रूप से काम करते-करते अपने आप को ठगा सा महसूस करते हैं. सरकार द्वारा जारी विज्ञापन में जहां संविदा पर कार्यरत व्यक्तियों को लाभ देना था वहां भी अब इस प्रकार के लाभ को समाप्त कर दिया गया है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है.

जितनी तैयारी,त्याग, समर्पण युवाओं ने अपने कार्य पर किया यदि वह तैयारी, त्याग, समर्पण कुछ युवा साथियों ने राजनीति में दिखाया होता तो आज बेरोजगार युवाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनेता होते.यदि ऐसा वास्तव में होता तो शायद प्रदेश में बेरोजगारी बिल्कुल भी नहीं होती. क्योंकि प्रदेश को चलाने वाले व्यक्ति प्रतिभाशाली एवं योग्य होते. जब अयोग्य लोग योग्य व्यक्तियों पर शासन करेंगे तो देश प्रदेश का हाल तो बुरा होना ही है.

सरकार द्वारा लगातार शासकीय विभागों का निजीकरण किया जा रहा है,स्वीकृत पदों पर नियुक्ति नहीं की जा रही है,नए पदों का सृजन नहीं हो रहा है,पदों की संख्या लगातार घट रही है,इन सभी कारणों से बेरोजगारी की समस्या लगातार बढ़ती चली जा रही है. 
हर युवा का एक सपना होता है कि वह पढ़ने लिखने के बाद एक बेहतर नौकरी प्राप्त कर सके लेकिन हमारे यहां का प्रशासनिक सिस्टम इस प्रकार से बनाया गया है कि बेरोजगार युवा परेशान होते होते अपनी जीवन लीला तक को समाप्त करने के लिए मजबूर हो जाता है.कई साथियों की अकाल मृत्यु हो चुकी है उसके लिए भी प्रशासनिक व्यवस्था पूर्ण रूप से जिम्मेदार है. मैं डॉ रामजी दास राठौर आप सभी बेरोजगार, अस्थाई रूप से कार्यरत समस्त विभागों के युवाओं से आव्हान करूंगा कि आप अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन राजनीतिक रूप से अवश्य करें और दिखा दें  कि युवाओं में वह शक्ति और जोश है कि यदि वह किसी की सरकार बना सकते है तो किसी की सरकार को गिरा भी सकते है. युवा जिस ओर करवट लेगा राज्य व्यवस्था उस ओर बदल जाएगी. युवा को कभी भी कमतर नहीं आंका जाना चाहिए. युवा देश का भविष्य है.यदि युवा के साथ हमेशा छल ही होता रहा तो देश प्रदेश का विकास कैसे होगा?

मैंने अपने अतिथि विद्वान साथियों को भी कई बार आव्हान किया है कि आप सभी राजनीतिक रूप से अपने आप को तैयार करें क्योंकि शिक्षक राजा नहीं होता बल्कि वह राजा बनाने वाला होता है लेकिन यदि देश प्रदेश में विषम परिस्थितियां आ चुकी हैं तो शिक्षकों को राज्य शासन व्यवस्था को अपने हाथों में लेने से भी परहेज नहीं करना चाहिए क्योंकि सरकार में जब तक आप का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनेता नहीं होंगे आप का शोषण लगातार होता रहेगा.क्योंकि जिसके पैर ना हुई हो बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई.  

युवा साथी परीक्षाओं के आवेदन भरते समय सरकार को काफी सारा शुल्क जमा करते हैं.इसी तरह से देश प्रदेश में होने वाले विभिन्न अवसरों पर चुनाव के समय खाली पदों पर अपने आवेदन भी भरें.यकीन मानिए बेरोजगार युवाओं द्वारा केवल नामांकन फॉर्म भरने से ही समस्त राजनीतिक दलों की नींद उड़ जाएगी तथा उन्हें समझ में आ जाएगा कि अब देश का युवा जाग चुका है .इसलिए  युवाओं के संबंध में हमें उचित निर्णय तत्काल लेने चाहिए नहीं तो यह बेरोजगार युवा हम सभी राजनेताओं को बेरोजगार कर देंगे और देश की सत्ता पर स्वयं काबिज हो जाएंगे.

मैं चुनाव आयोग से भी अपील करना चाहूंगा कि नामांकन भरने के नियमों में सरलता लाते हुए  नामांकन भरने का फॉर्म इस तरह से तैयार किया जाना चाहिए जैसे बेरोजगार युवाओं से स्वीकृत पदों पर फॉर्म भराए जाते हैं.उन्हें कोई प्रस्तावक समर्थक की आवश्यकता नहीं होती, उसी तरह से विभिन्न पदों के चुनावों पर भी प्रस्तावक एवं समर्थकों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए तथा युवाओं को आवेदन भरते समय नामांकन शुल्क यह सोच कर जमा करना चाहिए कि जिस तरह से हमारा परीक्षा शुल्क बर्बाद हो जाता है उसी तरह से हमारा नामांकन शुल्क डूब भी जाएगा तो परवाह नहीं लेकिन राजनीतिक लोगों को हम आईना जरूर दिखाएंगे. इस तरह प्रदेश के युवा अपनी राजनैतिक सक्रियता को साबित कर सकते हैं और जनता के सामने अपनी शोषण की कहानी की दास्तान व्यक्त कर सकते हैं.जनता है यह सब जानती है ,हकीकत क्या है सब पहचानती है,चुनी हुई सरकार को किस तरह से रातों-रात बदला गया है, यह भी जानती है,

जिन अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण के लिए सरकार बदली गई उनकी हालत आज भी जस की तस है. यदि विधानसभा उपचुनाव के पहले मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मध्य प्रदेश पुलिस विभाग एवं अतिथि विद्वानों, तथा  मध्य प्रदेश के समस्त शासकीय विभागों में कार्यरत समस्त प्रकार के अस्थाई कर्मचारियों को न्याय नहीं दिया गया तो सभी युवा साथी आप सभी का विधानसभा उपचुनाव में विरोध करेंगे तथा अपनी आवाज जन-जन तक पहुंचाएंगे.यदि युवा संगठित होकर जागरूक हो गए तो 27 की 27 विधानसभाओं पर बेरोजगार युवाओं को चुनाव मैदान में उतारते हुए आपको राजनीतिक रूप से भी चुनौती देंगे.आप राजनीतिक व्यक्ति हैं इस बात को अच्छी तरह से समझते हैं कि यदि विपक्ष में कोई भी व्यक्ति खड़ा है तो उस खड़े हुए उम्मीदवार को कमतर ना आंका जाए क्योंकि बड़ी-बड़ी हस्तियों को हराने के लिए जब जब आम व्यक्ति ने चुनाव में अपनी दावेदारी साबित की है बड़े बड़े व्यक्ति चुनाव हार गए इसका उदाहरण अभी लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिला. इसलिए समय रहते सरकार अपनी बुद्धि विवेक का प्रयोग कर बेरोजगार युवाओं के साथ न्याय करे. साथ ही किसी भी प्रकार के नए निजीकरण के प्रस्ताव प्रदेश में ना लाएं,जिससे कि सरकारी महकमे बने रहे। 
यदि समस्त सरकारी विभागों को बंद करते हुए निजीकरण की ओर ले जाया जा रहा है तो फिर सरकार की भी आवश्यकता क्या है?सरकार का भी पूर्ण रूप से निजीकरण कर दिया जाना चाहिए। 
स्वामी विवेकानंद ने कहा था तुम मुझे 100 युवा दे दो मैं देश की तस्वीर बदल सकता हूं.हमारे देश- प्रदेश में हजारों युवा पढ़े-लिखे, योग्य, समझदार,निर्भीक एवं ईमानदार हैं यदि उन सब ने अपने विचारों से क्रांति लाने का संकल्प ले लिया तो वह दिन दूर नहीं जब राजनीति में केवल योग्य व्यक्ति ही राज्य शासन को चलाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे तथा अयोग्य राजनैतिक व्यक्ति पूर्ण रूप से बेरोजगार हो जाएंगे। 
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