गड्ढों में तब्दील हुए करैरा भितरवार मार्ग पर किसानों ने धान लगाकर जताया अनोखा विरोध | Karera News


खुदी पड़ी सड़क पर 5 वर्षों से हो रहे हादसे, अभयारण्य मुक्ति मोर्चा ने सडको पर गड्डो में धान बोकर लगाए नारे

करैरा। करैरा तहसील के किसानों ने शनिवार  को करैरा-भितरवार मार्ग पर गड्ढों में तब्दील हुई सड़क को लेकर अनोखे अंदाज में विरोध जताया। इस दौरान किसानों ने छितरी-भितरवार तिराहे पर िस्थत सड़क पर निर्मित गहरे गड्ढों में धान बोकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था कि विधानसभा चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों ने इस खस्ता सड़क की हालत सुधारने को लेकर लुभावने वादे किए थे, लेकिन अभी तक सड़क की हालत जस की तस बनी हुई है और अब यह जनप्रतिनिधि आने वाले उपचुनाव को लेकर फिर से सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में इस बार अब इन जनप्रतिनिधियों को जनता सबक सिखाएगी। 

अभ्यारण मुक्ति मोर्चा के सदस्यों का कहना था कि उपचुनाव आते ही दावेदारी करने वाले नेता फिर से क्षेत्र में अपनी आमद दर्ज कर लुभावने वादे करने लगे हैं, लेकिन इन नेताओं को क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। करैरा विधानसभा में करैरा से भितरवार की दूरी महज 45 किलोमीटर है, लेकिन बदहाल सड़क होने की वजह से यह दूरी करने में 3 घंटे का समय लग रहा है। इसकी वजह यह है कि यह सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और आए दिन राहगीर इन गहरे गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। खास बात यह है कि बरसात के समय में यह सडक दलदल में तब्दील हो गई है। जहां सड़क हादसों में कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।  

इस विरोध प्रदर्शन मे 32 गांव से सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। इस मौके परश्रीनिवास रावत एडवोकेट, अशोक रावत, केशव पाल, बलबीरसिंह रावत, उम्मीदसिंह रावत, जितेंद्र रावत, आशीष सेन, नीरज शर्मा, नरेंद्र रावत, अशोक भार्गव, सुनील रावत, विशाल रावत, राजीव रावत, द्वारका विश्वकर्मा, विनोद तिवारी, रामेश्वर रावत, अजय रावत, ओमप्रकाश रावत, जितेंद्र रावत, दिलशान रावत, शिवम पांडे, अरविंद जैन, नरेंद्र सोलंकी, शिवम सोलंकी, कपिल दुबे, विनय पांडे, राहुल पांडे, मोहन स्वरूप शर्मा, अभिषेक सेन, धनीराम साहू, अजमेरसिंह रावत, रामबरन गुर्जर, गोपालसिंह गुर्जर, अशोक रावत, विशाल वेरखेडा, प्रशांत गुर्जर, दुर्गसिंह सिकरवार, प्रेमसिंह जाटव, जारसिंह बंशकार, धर्मेंद्र कोली, मुकेश गुप्ता, पातीराम परिहार, रामकिशन परिहार मुढैनी, लाखनसिंह नैनागिर, श्रीपाल सिंह सोलंकी, लालसिंह दाऊ बरुआ आदि मौजूद थे।
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