लारिया बने संभागीय संयुक्त संचालक मण्डी ,चक्रवर्ती की छुट्टी | Shivpuri News


शिवपुरी मण्डी कांड में लापरवाही बरतने के लगे थे आरोप
अजय सिंह कुशवाह ग्वालियर। संयुक्त संचालक म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड आंचलिक कार्यालय ग्वालियर आर पी चक्रवर्ती को हटा कर हरीराम लारिया को संयुक्त संचालक बनाया गया है।जबकि चक्रवर्ती को प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित कर म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड मुख्यालय भोपाल पदस्थ किया गया है। शिवपुरी मण्डी में प्याज किसानों के आंदोलन के काण्ड के बाद आरोपों के छींटे संयुक्त संचालक चक्रवर्ती तक पहुंचे थे ,कहा जा रहा है कि इसीके परिणामस्वरूप उनका स्थानांतरण किया गया है।चक्रवर्ती का स्थानांतरण आदेश बोर्ड के एम डी संदीप यादव के आदेश से जारी हुआ है।
उल्लेखनीय है कि शिवपुरी मंडी में प्याज किसानों द्वारा जबर्दस्त हंगामे के बाद वहाँ के तत्कालीन प्रभारी सचिव ए एस तौमर पर गंभीर अनियमितताओं के  आरोपों के बाद चक्रवर्ती भी निशाने पर आ गये थे। शिवपुरी मंडी में मंडी प्रशासन और प्याज व्यापारियों ,तुलावटियों की मिली भगत कर पर किसानों का आर्थिक शोषण और सरकारी राजस्व को लगाए गए चूने के बावजूद संयुक्त संचालक चक्रवर्ती द्वारा बरती गई लापरवाही के फलस्वरूप किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा । हालांकि मामला  जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ढीला पड़ा । बाद में सचिव तौमर का स्थानांतरण मकसूदनगढ़ मण्डी में और अन्य दो कर्मचारियों हजारीलाल सेन व शिवशंकर शर्मा के अटैचमेंट  क्रमशः पोहरी और कोलारस कर दिए गए थे । बाद में तौमर ने जुगाड़ लगा कर अपना आदेश संशोधित करवा कर आंचलिक कार्यालय ग्वालियर में अटैचमेंट करवा लिया था।
*चक्रवर्ती और तौमर की थीं नजदीकियां*
बताया जाता है कि तौमर और आरपी चक्रवर्ती के बीच की ट्यूनिंग ही इस संशोधित आदेश के पीछे की मुख्य वजह थी।
    सूत्रों की मानें तो सचिव तौमर ने जानबूझकर अपना मकसूदनगढ़ का आदेश संशोधित करा कर वापिस ग्वालियर कराया ताकि चक्रवर्ती से अपनी नज़दीकियों का लाभ लेकर भविष्य में किसी मलाईदार मंडी या पद पर बैठकर चाँदी काटी जा सके।
  *जांच हुई तो तौमर का नपना तय*
सचिव तौमर पर शिवपुरी मण्डी में हुई गड़बड़ियों का जिम्मेदार मान कर मात्र स्थानान्तरण की कार्यवाही कर लीपापोती कर दी गई,जबकि किसान मामले के जांच कर तौमर के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की मांग पर अड़े थे। तौमर पर मंडी व्यापरियों से मिली भगत कर कच्ची रसीद पर प्याज खरीदी,कम तौल ,आढ़त वसूली के सहित कई गंभीर आरोप लगे थे।
       बताया जा रहा है कि तौमर के विरुद्ध सबूत इतने पुख्ता हैं कि यदि मामले की जांच ईमानदारी से हो जाये तो किसानों के आर्थिक दोहन और सरकारी राजस्व को हानि पहुंचाने के कई गंभीर और चौंकानेवाले खुलासे  होना तय हैं। खबर है कि इस जांच को दबाने के लिये बड़ा लेनदेन किया गया है।

नया पेज पुराने