संयम खोते भारत में जब जिसने आस बंधाई दी, इतिहास की सफल शासिका वही अहिल्याबाई थी | Shivpuri News


अहिल्याबाई होल्कर जयंती पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित

शिवपुरी। संयम खोते भारत में जब जिसने आस बंधाई दी, 
इतिहास की सफल शासिका वही अहिल्याबाई थी।
गर्व रहेगा भारत मां को कि तू भी उसकी जाई थी, 
कही गई देवी जो मात अहिल्याबाई थी।  
ऐसे युग में अटल रहीं जब विश्वासों के समर रहे,
जो जनमानस की बनी चेतना पुण्यश्लोक वो अमर रहे।।
ये पंक्तियां लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर पाल बघेल समाज द्वारा आयोजित आॅनलाइन कवि सम्मेलन में शिवपुरी की युवा कवियत्री मनु वैशाली पाल ने काव्य पाठ करते हुए कहीं। आॅनलाइन कवि सम्मेलन में मध्यप्रदेश सहित उत्तरप्रदेश के विभिन्न कवियों ने भाग लिया और अपनी कविताआंे के माध्यम से अहिल्याबाई होल्कर की धर्म परायणता तथा कर्तव्य परायणता को याद किया। कवि सम्मेलन का प्रारंभ मनु वैशाली द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति के साथ हुआ। 
इसी क्रम मंे आगर मालवा के कवि दशरथ मसानिया ने अपने काव्य पाठ करते हुए सुनाया
होल्करों के वंश मंे अहिल्याबाई महान,
भारत भूमि धन्य करी, कीन्हा जन कल्याण।
भैगांव मैनपुरी के कवि डाॅ. अरविंद कुमार पाल ने अपनी प्रस्तुति में बताया
होल्कर रानी को युद्ध कौशल बहुत सुहाता था
युद्ध भूमि में शत्रु दल नतमस्तक हो जाता था.....।
आॅनलाइन कवि सम्मेलन में इटावा उत्तरप्रदेश के कवि रवि पाल, अरविंद अलबेला अलीगढ़, रूपेश कुमार धनगर मथुरा, पवन पाल लखीमपुर, सरोज बघेल फिरोजाबाद, दिलीप बघेल ओज टुण्डला उप्र ने भी काव्य पाठ किया और देवी अहिल्याबाई होल्कर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम मंे आभार प्रदर्शन पाल महासभा के जिलाध्यक्ष एडवहोकेट रामस्वरूप बघेल, इंजी गोपाल पाल, हरनारायण पाल, माधव सिंह बघेल, रामकिशन पाल, संजय पाल, रविन्द्र पाल ने भी संक्षिप्त उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन नेपाल सिंह बघेल ने किया। 

लाॅकडाउन में दीपोत्सव के रूप में मनी जयंती

कोरोना संक्रमण के चलते चल रहे लाॅक डाउन में देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती लोगांे ने घर-घर दीप जलाकर मनाई। इस दौरान लोगों ने दीपोत्सव के साथ-साथ लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से भी शुभकामना संदेश प्रसारित किये। सम्भवतः यह पहला मौका है जब घर घर में लोगों ने देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पूरे श्रद्धाभाव से मनाई इससे पूर्व सिर्फ सार्वजनिक मंचों पर ही कार्यक्रम होते थे मगर इस बार घर घर में लोगों ने जयंती को दीपोत्सव के रूप में सादगीपूर्ण ढंग से मनाया।
नया पेज पुराने