कहीं शिवपुरी का जिला अस्पताल अब कोरोना का गृभगृह तो नही बन जायेगा ?



मणिका शर्मा "मणि"

शिवपुरी । शिवपुरी में अगर 22 मार्च से अभी तक की बात की जाए तो कोरोना का कहर दिन प्रति दिन बढ़ता ही नज़र आ रहा है । लॉक डाउन की शुरुआत में तो सब शायद कंट्रोल में नज़र आ रहा था । मगर आज की परिस्थितियां अलग ही है। एक समय जब कोरोना की शुरुआत हुई थी एक मरीज निकलने पर पूरे जिले में हड़कंप मच गया था। पूरा जिला पूरी तरीके से लॉक डाउन कर दिया गया था। मगर आज जब जिले में 11 एक्टिव मरीज है, फिर भी पूरा जिला सामान्य रूप से लगभग खुला हुआ है। मैं मानती हूं की अर्थव्यवस्था का इस पूरे कोरोना काल में भारी नुकसान हुआ है। पूरे देश की अर्थव्यवस्था डामाडोल स्थिति में आ चुकी है। 
अब बात करे शिवपुरी जिले की तो यह वही शिवपुरी है जो शिव की नगरी और सिंधिया राजघराने की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी। इसको बसाया ही घने जंगलों के बीच इसलिए गया था कि गर्मियों के दिनों में भी यहां पर ठंडक का एहसास होता था इसीलिए शिवपुरी को मिनी शिमला भी कहा जाता है। 
लेकिन यदि अब बात की जाये कोरोना से जंग की तो हर दूसरे दिन यहाँ कोरोना के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। 
कल जब शिवपुरी में तीन कोरोना के नए पॉजिटिव मरीज मिले तो शिवपुरी को फिर एक बार 11000 वाट का झटका लग गया। शिवपुरी में आज जब तीनों कोरोना पेशेंट की ट्रैवल हिस्ट्री की बात की गई तो दो की ट्रेवल हिस्ट्री करेरा के बैंक ऑफ इंडिया से सामने आ गई। यहाँ तो चलो कैसे तैसे लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन जब शिवपुरी के नजदीक चित्तौरा गांव के एक आदिवासी कोरोना पॉजिटिव युवक की सर्च हिस्ट्री की बात की गई तो मामला बेहद चौका देने वाला दिखाई दिया। यह युवक 8 से 10 दिन से अस्पताल मे ही था क्योंकि वह एक टीवी का मरीज है। कल जब उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है तो मालूम चला की कल ही के दिन रिपोर्ट आने के 2 घंटे पहले ही अस्पताल से उसकी छुट्टी कर दी गई थी । 
अब सबसे बड़ी बात तो यह है कि टीवी वार्ड में आखिर कोरोना ने जन्म कैसे लिया और अगर टीवी वार्ड ने कोरोना संक्रमण के रूप में जन्म ले लिया है तो, पता नहीं अस्पताल के कौन कौन से वार्ड में इस कोरोना का जन्म हो चुका होगा और पता नहीं कितने भागों में कितने मरीजों के साथ कितने अटेंडरों के साथ कितने डॉक्टरों के साथ कोरोना और जन्म लेगा। लेकिन फिर भी शिवपुरी जिले के स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को सलाम। वह टीम अपनी पीठ पर आंच आने पर अभी भी बाज नहीं आ रही है। शिवपुरी जिले के सीएमएचओ को आज भी लगता है कि उन्होंने कोरोना काल में बड़े-बड़े झंडे गाड़ दिए लेकिन हकीकत से रूबरू होने से शायद डरते नजर आ रहे हैं। इस कोरोना काल में भी कुछ अधिकारी तो अपना मंजा सुतते नज़र आये ।।

जनता के सवाल ----:

1 क्या अस्पताल अभी भी सुरक्षित है ?

2 क्या डॉक्टर्स/पुलिस/मीडिया कर्मी सुरक्षित है अपनी सुरक्षा को लेकर ? (जो अस्पताल गए है)

3 क्या इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी सीएमएचओ शिवपुरी रहेंगे या होगी कोई कार्यवाही ( क्या फिर हर बार कि तरह होगी राजनीति) ?

अब देखने वाली बात तो ये होगी कि क्या होता है आगे ।
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