राज्य मंडी बोर्ड के एम.डी.और संयुक्त संचालक तक नही बता पाए प्याज खरीदी के नियम | Shivpuri News


अजय सिंह कुशवाह शिवपुरी। शिवपुरी मंडी में इस वर्ष प्याज की बम्पर आवक के साथ ही किसानों के साथ लूट-खसौट का खेल शुरू हो गया। शनिवार की सुबह प्याज के किसानों ने ग्राम पिपरसमा स्थित शिवपुरी मंडी में कथित रूप से व्याप्त भ्र्ष्टाचार को लेकर जोरदार हंगामा खड़ा कर दिया। किसानों ने प्याज व्यापारियों पर अधिक तौल और आड़त लेने का आरोप लगाते हुए मंडी सचिव और कर्मचारियों पर मिलीभगत का संगीन आरोप लगा कर हंगामा खड़ा किया।
किसानों का आरोप था कि प्याज व्यापारी (आड़तियों) द्वारा प्याज  40 किलो के बजाय  42 किलो तौली जा रही है, इसके अलावा 5% आड़त वसूली जा रही है तथा तौल खत्म होने पर आड़तियों द्वारा एक बोरी प्याज मुफ्त में ली जारही है। इस सारे घालमेल में मंडी सचिव सहित पूरा प्रशासन मिला हुआ है। किसानों का आरोप है कि शिवपुरी मंडी में प्याज खरीदी की कच्ची रसीद दी जारही है और ओनेपोने दामों में प्याज की खरीदी की जा रही है। जब हमने किसनों के इन आरोपों की सच्चाई जानने का प्रयास किया तो स्थिति हैरान करने वाली थी। शिवपुरी मंडी सचिव ने जहाँ गलत जानकारी देते हुए पल्ला झाड़ लिया वहीं म.प्र. मंडी बोर्ड के अध्यक्ष और संयुक्त संचालक ने नियमों की जानकारी ना होने की बात कह किनारा कर लिया। 

क्या है प्याज खरीदी के नियम..?

मंडी समितियों के लिये उपविधियाँ 2000(यथा संशोधित 2019) की उपविधि 37/1के अनुसार किसी भी प्रकार की अधिसूचित कृषि उपज का क्रय विक्रय खुली घोष के द्वारा किया जाता हैं ,जिसमें अनुबंध पर्ची 37 (1)जारी की जाती हैं। कृषक से किसी भी प्रकार का शुल्क या आड़त के रूप में किसी भी प्रकार की राशि नही ली जाती है।
इस उपविधि के अनुसार कोई भी व्यक्ति ,जो अधिसूचित कृषि उपज का मंडी क्षेत्र में क्रय करेगा,विक्रेता के पक्ष में 3 प्रतियों में करार ऐसे प्रारूप में ,जैसा कि विहित किया जाए,निष्पादित करेगा।करार की एक प्रति क्रेता के द्वारा रखी जायेगी ,एक प्रति विक्रेता को दी जायेगी तथा शेष प्रति मंडी समिति के अभिलेख में रखी जायेगी। 
एक और अन्य संशोधन के तहत सौदा-पत्रक के द्वारा भी क्रय की जा सकती है। 

मंडी सचिव ने दी गलत जानकारी
जब इस उपविधि के विषय मे शिवपुरी मंडी सचिव अनिरुद्ध सिंह तौमर से बात की गई तो उनका कहना था कि प्याज पर 37/1की अनुबंध पर्ची जारी   नही की जाती है बल्कि आड़त ही लगती है।                    

मंडी बोर्ड के एम.डी.और संयुक्त संचालक भी नही बता पाये नियम

इस मामले को लेकर जब म.प्र. मंडी बोर्ड के एम.डी.संदीप यादव से जानकारी लेनी चाही तो उनका उत्तर चौंकाने वाला था ,उन्होंने कहा कि ये 37/1 क्या होता है ? जब उन्हें बताया गया तो बोले कि मुझे जानकारी नही है ,मेरे किसी अधीनस्थ से बात करें।संदीप यादव के इस जबाव पर हमने ग्वालियर स्थित संयुक्त संचालक मंडी आर.पी.चक्रवर्ती से बात की तो उन्होंने कहा कि मैं जानकारी लेकर आपको बताता हूँ ,इसके बाद उन्होंने अपना मोबाइल बन्द कर लिया।
इस पूरी तफ्तीश के बाद निश्चित तौर पर यह माना जा सकता है कि नीचे से ऊपर तक आकंठ भ्रष्टाचार में लिप्त मंडी प्रशासन के तले भूमिपुत्रों के शोषण  का अपराध  कारित किया जा रहा है । जहाँ एक ओर हमारा देश- प्रदेश वैश्विक महामारी की चपेट में संघर्षरत है वहीं शासन-प्रशासन के ये निकम्मे कारिंदे इस संवेदनशील समय में भी अपने घृणित भ्र्ष्टाचार का खेल ,दिनरात एक कर खून-पसीने से सींचीं पैदावार से सभी  की उदर पूर्ति करने वाले अन्नदाताओं से खेलने से बाज नही आ रहे हैं।
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