शत्रु के दल संहारण को बन जाते क्रुद्ध कपाली थे : रुचि चतुर्वेदी | Shivpuri News


तात्या टोपे को दिन भर शब्दो से दी ऑनलाइन कवि सम्मेलन में श्रद्धाजंलि

शिवपुरी। लगातार छब्बीस वे दिन जारी ऑनलाइन कवि सम्मेलन में देश भर के कवियों ने तात्या टोपे के बलिदान दिवस पर शब्दो से श्रद्धांजलि दी,वीडियो अपनी कविता की बना प्रसारण करने में सभी राष्ट्रीय व स्थानीय कवियों ने मुह पर मास्क लगा व हाथ सेनेटाइज कर दिखा एक संदेश भी प्रसारित किया और घर रहकर घर रहने का आग्रह करते हुए तात्या टोपे का बलिदान दिवस मनाया।
कार्यक्रम की शुरुआत ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की आराधना को प्रस्तुत कर  पिछोर की कवियित्री परवीन महमूद ने किया। राष्ट्रीय कवि आगरा की रुचि चतुर्वेदी ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि पांडुरंग श्रीरामचंद्र जिनका था पूरा नाम सुनो,येवला पटौदा पुण्य पावन उनका धाम सुनो,गोरिल्ला युद्ध प्रणाली में जो पारंगत बलशाली थे, शत्रु के दल संहारण को बन जाते क्रुद्ध कपाली थे।
राष्ट्रीय कवि इटावा उत्तरप्रदेश के कमलेश शर्मा ने सुनाया की तात्या जैसे वीर सुनो सदियों में ही लेते जन्म है,जिनकी गौरवगाथा के किस्से गूंजते है जग में सारे।
राष्ट्रीय कवि नागपुर के पुष्पेंद्र पुष्पक ने कहा कि कवियो की कलम वन्दे मातरम गान नही लिखती,इंकलाब से नारो का सम्मान नही लिखती,सरफरोशी की तमन्ना दिलो में कैसे लग पाती, भगत सिंह के सीने में चिंगारी कैसे लग पाती।
कानपुर के यतीश अकिंचन ने शत शत नमन है भारती को और हिंदुस्तान को,शत शत नमन निज देश पर होते हुए बलिदान को सुनाया।
आशुतोष ओज ने उसी सिंह शावक तात्या ने इतिहास बना डाला,रौद्र रूप दिखला शम्भू ने जीवन अमर बना डाला,अपनो के ही षड्यंत्रों से लेकिन उसको बांध लिया,फुट डालकर भारत भर में गोरों ने हित साध लिया प्रस्तुत की।
विकास शुक्ल प्रचंड ने वीर प्रसूता भारत माँ की अपनी अमिट कहानी है,वीरों की गाथाओं की यहाँ बहती मध्य रवानी है प्रस्तुत की।
अवधेश सक्सेना ने येवला महाराष्ट्र में,पांडुरंग राव घर,रामचन्द्र जन्म लिये, तात्या प्यारा नाम था,ईस्ट इंडिया कंपनी तोपखाना रेजिमेंट,तात्या को न रोक सकी,छोड़ दिया काम था सुनाई।
लखनलाल जी खरे ने बुद्धिजीवी सब इकट्ठे हो गये है,इस देश मे अब और रटते हो गए है,ज्ञान पर संगोष्ठिया इतनी हुई,ज्ञान के अंगूर खट्टे हो गए है,सुनाई।
नवीन पाराशर ने ए पवन सुन अरज मेरे मन की एक आस,प्यारी माँ को कहना मरते बेटे की आस,अपूर्वा श्रीवास्तव ने एक वीर योद्धा थे तात्या जिनका नाम था,अंग्रेजो के शासनकाल में लड़ना जिनका काम था,शिवानी रजक ने छोड़ सब स्वर्ग से सुख जंगल मे डाला डेरा था,सूर्य था क्रांति का मन मे हर कार्य मे सवेरा था,रमन शर्मा ने सन सत्तावन के अमर शहीद जो बल माथे पर डाल गये, ऋषि धरा को पावन करने फांसी का फंदा नाप गये, विवेक वाजपेयी ने शहादत की इबादत को में चुनकर फूल लाया हूं,चढ़ाने अपने मस्तक पर उठाने धूल आया हु,अजय शंकर महाराज ने द्रवित अर्पित है करता,कर जोड़कर श्रद्धा सुमन,शहीद हुए श्री तात्या,गुलजार कर ये चमन सुना अपनी प्रस्तुति दर्ज कराई।
भारत के श्रेष्ठ  मोटिवेशनल स्पीकर शैलेन्द्र सिंह इंदौर ने भी अपने विचारों को प्रस्तुत कर तो कोरोना पर गीत लिखने वाले अंकित सक्सेना और आकांक्षा गौर ने भी अपनी सुमधुर आवाज से प्रस्तुति देकर पटल को मंत्रमुग्ध  किया।कार्यक्रम तात्या टोपे को श्रद्धाजंलि अर्पित कर 12 बजे से प्रारम्भ हुआ जो अनवरत रात्रि के 8 बजे तक चलता रहा।कार्यक्रम के अंत मे आभार करेरा महाविद्यालय के प्राचार्य लखनलाल जी खरे ने माना दिन भर कार्यक्रम का संचालन आशुतोष ओज ने किया।
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