पहली बार बड़े धूम धाम से मनाई गई सन्त गाडगे महाराज की जयंती


भिड़। मध्यप्रदेश के भिंड जिला के ग्राम मेघपुरा में सन्त गाडगे बाबा का नाम तक नहीं जानते थे। मनाई गई जयंती मिसाल बन गई। ये सब साकार हो सका *कवि-आर.सी.वर्मा* के मार्गदर्शन में, वर्मा जी अपने गांव के युवाओं को सन्त गाडगे महाराज के बारे में अवगत कराते रहते थे। बाबा द्वारा किये गये स्वच्छता मिशन और शिक्षा पर प्रयासों के संदेशों से प्रेरित होकर रजक समाज और जाटव समाज के लोगों ने गाडगे बाबा के छाया चित्र को रोशन झालर से सजाया। फूलों से भरे थाल में कुमकुम रोरी,हल्दी,चन्दन और दीपक देखते ही बनता था। सन्त गाडगे महाराज की आरती श्री विद्यारम वर्मा (फौजी) बारेलाल वर्मा, रतिराम वर्मा, रामस्वरूप नावरिया,हरनारायण,बिकास खत्री अशोक खत्री महेश वर्मा महादेव वर्मा कुंदन गर्ग,रुस्तम जाटव,जगदीश जाटव समस्त रजक और जाटव समाज के बुजर्ग लोगों ने की।
महिलाओं और बच्चों ने भी पुष्प अर्पित किये। बाबा के संदेशों को श्री रामनिवास खत्री ने सबको सुनाया। सभी छात्र युवाओं ने जयंती मनाने में जो उत्साह दिखाया वो यादगार बन गया। छोटी छोटी बच्चियों ने वर्मा जी द्वारा लिखे गाने को प्रस्तुत किया तब ऐसा लगा कि इस महान संत को पुनः धरती पर आने के लिये विवश न होना पड़े। अन्य समाज के लोगों ने भी गाडगे महाराज को पुष्प अर्पित किये।
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