संघर्ष जितना कठिन होगा, जीत उतनी बड़ी होगी: स्वामी विवेकानंद | Shivpuri News


शिवपुरी। स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस के अवसर पर डॉ.रामजी दास राठौर ने युवाओं को संदेश देते हुए बताया कि भारत देश की अधिकतर आबादी युवाओं की है और किसी भी देश का भविष्य उसके युवाओं पर ही निर्भर करता है। नई प्रतिभा के आने से देश को ना सिर्फ तरक्की मिलती है, बल्कि देश का विकास भी सही तरह से होता है। वहीं देश के युवाओं के सही मार्ग दर्शन के लिए हर साल भारत में युवा दिवस मनाया जाता है। भारत में युवा दिवस मनाने की शुरुआत साल 1985 से शुरू हुई थी। वहीं इस दिन को युवा दिवस के तौर पर मनाने का ऐलान साल 1984 में की गया था। युवा दिवस मनाने के लिए सरकार द्वारा स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस को चुना गया था और तब से अब तक हर साल इस दिन युवा दिवस पूरे देश में मनाया जाता है।
'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए' का संदेश देने वाले युवाओं के प्रेरणास्त्रो‍त, समाज सुधारक युवा युग-पुरुष 'स्वामी विवेकानंद' का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता (वर्तमान में कोलकाता) में हुआ। इनके जन्मदिन को ही राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। किसी भी देश के युवा उसका भविष्य होते हैं। उन्हीं के हाथों में देश की उन्नति की बागडोर होती है। आज के पारिदृश्य में जहां चहुं ओर भ्रष्टाचार, बुराई, अपराध का बोलबाला है। यह सभी बुराइयां देश को अंदर ही अंदर खाए जा रही हैं। ऐसे में देश की युवा शक्ति को जागृत करना और उन्हें देश के प्रति कर्तव्यों का बोध कराना अत्यंत आवश्यक है। विवेकानंद जी के विचारों में वह क्रांति और तेज है जो सारे युवाओं को नई चेतना से भर दे। उनके दिलों में नई ऊर्जा और सकारात्कमता का संचार कर दे। उन्होंने युवाओं को धैर्य, व्यवहारों में शुद्ध‍ता रखने, आपस में न लड़ने, पक्षपात न करने और हमेशा संघर्षरत् रहने का संदेश दिया।
स्वामी विवेकानंद के विचारों के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. रामजी दास राठौर ने बताया कि स्वामी विवेकानंद का मानना था कि आप प्रभु पर तभी यकीन कर सकते हैं जब आप स्वयं पर यकीन करेंगे। विवेकानंद जी के अनुसार व्यक्ति को तब तक मेहनत करती रहनी चाहिए जब तक जो अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच जाता। अगर कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी लगन और मेहनत करेगा, तो वो जरूरी कामयाब होगा। उनके अनुसार, व्यक्ति को केवल उसकी आत्मा ही सिखा सकती है। आपकी आत्मा आपकी सबसे अच्छी गुरू है। विवेकानंद जी के मुताबिक अगर भगवान को आप अपने अंदर और दुनिया की जीवित चीजों में नहीं देख पाते, तो आप भगवान को कहीं भी नहीं देख सकते हैं।उनका विचार था कि मनुष्य का संघर्ष जितना कठिन होगा, उसकी जीत भी उतनी बड़ी होगी। युवाओं के संबंध में स्वामी विवेकानंद जी के विचार हैं कि हर युवा के पास ताकत होती है कि वो अपने आनेवाले कल को अच्छा बना सके। युवाओं द्वारा जो मेहनत या पढ़ाई की जाती है, वो उसके भविष्य में जाकर उसे फल देती है। अगर कोई कार्य करते हुए आप से कुछ गलत हो जाता है, तो इसका मतलब ये नहीं की आप हार गए हैं बल्कि इन गलतियों का मतलब है कि आप कुछ पाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। अगर आप सकारात्मक सोच रखेंगे तो आपके साथ सब कुछ अच्छा ही होगा। आप किसी भी लक्ष्य को पाने में तभी नाकाम होते हैं, जब आपके अंदर उसे पाने का जज्बा खत्म हो जाता है। इसलिए आप कभी भी अपने अंदर के जज्बे को खत्म ना होने दें। लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं इस चीज से ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि आप अपने बारे में क्या राय रखते हैं। क्योंकि आपको आप से बेहतर कोई ओर नहीं समझ सकता।
कोई भी मुनष्य अपने आपको सही राह पर चला सकता है। इसलिए जब भी आपको लगे की आप गलत राह पर चल रहे हैं, तो अपनी दिशा या राह खुद बदल लें।
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