किसानों और व्यापारियों का कर्जा माफ करने वाली सरकार सरकार। हमारा कब कर्ज कब चुकाएगी : डॉ रामजी दास राठौर | Shivpuri News


शिवपुरी। मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग की अतिथि विद्वान व्यवस्था में अपने जीवन के 18 -20 वर्षों तक लगातार पूर्ण समर्पित भाव सेवा देने के बाद आज सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों के साथ जो दुर्व्यवहार किया जा रहा है वो काफी निंदनीय है। इसका विरोध मध्य प्रदेश अतिथि विद्वान संघ द्वारा भोपाल में किया जा रहा है। पिछले कई दिनों से अतिथि विद्वान विषम परिस्थितियों में हड़ताल पर बैठे हुए हैं जबकि मध्यप्रदेश शासन प्रशासन गहरी नींद में सो रहा है। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि जहां कांग्रेस पार्टी में ने अपने संकल्प पत्र के वचन क्रमांक 17.22 में लिखा था कि अतिथि विद्वानों को उच्च शिक्षा विभाग में समायोजित कर लिया जाएगा क्योंकि अतिथि विद्वान योग्य एवं अनुभवी हैं तथा उनका चयन पूर्ण पारदर्शिता के साथ किया जाता है। उच्च शिक्षा मंत्री माननीय जीतू पटवारी ने समय-समय पर अतिथि विद्वानों को आश्वस्त किया था कि हम आपको व्यवस्था में बनाए रखेंगे लेकिन अब पीएससी चयनित लोगों की जॉइनिंग के साथ ही अतिथि विद्वानों की सेवाएं समाप्त की जा रही हैं जो कि काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। अतिथि विद्वानों ने ₹1800 महीने से अपनी नौकरी प्रारंभ कर ₹8000 प्रति माह ₹18,000 प्रतिमाह एवं वर्तमान में ₹35000 प्रति माह तक आने के लिए लगातार संघर्ष किया अपना जीवन अभावों में गुजारा, सिर्फ एक उम्मीद के साथ की योग्यता एवं अनुभव के आधार पर आगे जाकर सरकार उनको कहीं ना कहीं फायदा देगी लेकिन हुआ बिल्कुल विपरीत। जिंदगी के इस मुकाम पर आने के बाद आज अतिथि विद्वानों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है जो काफी निंदनीय है।प्रश्न इस बात का है कि सरकार के पास किसानों एवं व्यापारियों का कर्जा माफ करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन है लेकिन जब बात अतिथि विद्वानों की वेतन की आती है तो उस स्थिति में सरकार के पास वित्तीय संकट आ जाता है। सरकार द्वारा प्रदेश के अतिथि विद्वानों का जो समय एवं श्रम लिया गया तथा उन्हें बिना पर्याप्त वेतन की अभाव में जीवन जीने को मजबूर किया गया उसका कर्ज चुकाने का समय आ गया है। सरकार अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण करें तथा केवल उन्हीं की विभागीय परीक्षा संपन्न कराते हुए स्थायित्व प्रदान करे। अन्यथा उनके समय एवं श्रम का प्रयोग करने के कारण जो उनकी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षति हुई है उसकी हर्जाना राशि सरकार को चुकानी चाहिए। समय समय की बात है समय बड़ा बलवान, भीलन लूटी गोपिका वही अर्जुन वही बाण।अतिथि विद्वान ना किसी से कम थे, ना हैं, ना रहेंगे। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ना केवल अतिथि विद्वानों के साथ न्याय करना चाहिए बल्कि प्रदेश के अन्य सभी विभागों में कार्यरत अस्थाई कर्मचारी जिन्होंने अपना पूरा जीवन सरकार को समर्पित कर दिया उनके साथ भी न्याय करते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिए लेना चाहिए सरकार हिम्मत दिखाएं और एक कदम आगे बढ़ाएं क्योंकि एक समृद्धशाली सरकार के लिए सभी के साथ न्याय करना आवश्यक है। इसलिए मध्य प्रदेश सरकार को अतिथि विद्वानों का शोषण तत्काल प्रभाव से बंद करते हुए उनके साथ न्याय करना ही चाहिए।
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