अतिथि विद्वानों का आमरण अनशन जारी | Shivpuri News


शिवपुरी। अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के बैनर के तले मध्य प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि विद्वानों के द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल धरना प्रदर्शन शाहजनी पार्क भोपाल में किया जा रहा है। इस क्रम में 11 दिसंबर से अतिथि विद्वानों द्वारा आमरण अनशन जारी है। जिसमें साथी अतिथि विद्वान डॉ शशि कला पटेल, सुश्री दीपिका तिवारी, श्री मनोज नागले, श्री नरेंद्र कुमार पांडे लगातार संघर्ष कर रहे हैं। मध्य प्रदेश शासन द्वारा अतिथि विद्वानों की मांगों के संबंध में अभी तक आमरण अनशन पर बैठे साथी अतिथि विद्वानों पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया है तथा आमरण अनशन पर बैठे सभी अतिथि विद्वानों की हालत अत्यंत गंभीर होती जा रही है। जबकि बीते दिनों में पक्ष एवं विपक्ष के सभी नेता मंच पर आकर अतिथि विद्वानों के संबंध में आश्वासन दे रहे हैं कि आप सभी की नियमितीकरण के संबंध में कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उच्च शिक्षा मंत्री माननीय जीतू पटवारी के द्वारा कल एक आदेश पत्र जारी किया गया जिसमें अतिथि विद्वानों की चॉइस फिलिंग 18 दिसंबर से प्रारंभ की गई है। इस आदेश की प्रतियां जलाकर अतिथि विद्वानों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। आज विधानसभा में अतिथि विद्वानों की बात को पुरजोर तरीके से रखे जाने की संभावना है। इस संबंध में विचार रखते हुए डॉ राम जी दास राठौर में बताया कि अतिथि विद्वानों का संघर्ष पिछले 20 वर्षों से लगातार जारी है। सरकारों द्वारा अतिथि विद्वानों की योग्यता एवं अनुभव का दुरुपयोग किया जा रहा है।अतिथि विद्वान व्यवस्था में सभी अतिथि विद्वानों को नियमित किया जाना आवश्यक है। महाविद्यालयों में जो पद स्वीकृत हैं वह पिछले 20 वर्षों से उतने ही हैं। यदि पदों को छात्र अनुपात में निर्धारित किया जाता है तो वर्तमान पदस्थापना के अनुपात में दोगुने और नए पदों का सृजन किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में किसी अतिथि विद्वान को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जाएगा। मध्यप्रदेश शासन इस वादे के साथ सत्ता में आया है कि वचन क्रमांक 17.22 के आधार पर सभी अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण किया जाएगा। मध्यप्रदेश शासन को अपने वादे को हर हाल में निभाना चाहिए तथा अतिथि विद्वानों के साथ न्याय करते हुए एक बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए कि मध्य प्रदेश की सरकार सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, में विश्वास रखती है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा इस तरह का निर्णय लेने की स्थिति में 5200 कार्यरत अतिथि विद्वानों का रोजगार बचाया जा सकता है तथा उन सभी के परिवारों को विषम परिस्थितियों से ना गुजरना पड़े इसके लिए एक सार्थक प्रयास किया जा सकता है।
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