मुख्यमंत्री के आदेश के बाद शहर के भू माफियाओं में मचा हड़कंप | Shivpuri News



दस साल में खड़ी की गई एक सैकड़ा से अधिक अवैध कॉलोनिया 

ईमानदारी से जांच हुई तो कई भू माफियाओं होंगे सालाखों के पीछे 

शिवपुरी। मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा प्रदेश को माफिया मुक्त करने के फैंसले के बाद शिवपुरी के भू माफियाओं में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई है। माफियाओं द्वारा शहर के चारों ओर स्थित कृषि योग्य भूमि को किसानों से सरस्ते दामों में खरीदकर शासकीय नियमों को ताक पर रखकर शहर के भोले भाले उपभोक्ताओं को मंहगे दामों पर विक्रय किया जा रहा हैं। इतना ही नहीं बगैर सुविधा के लोगों को कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। कॉलोनी में उपभोक्ताओं को बिजली, पानी, सड़क, नाली, सीवेज, पार्क मंदिर सुविधा देने के नाम पर भोले  भाले नागरिकों को गुमराह कर भवन थमा दिए जाते हैं। भवन विक्रय के बाद माफिया उस कॉलोनी की तरफ देखते तक नहीं हैं और लोग सुविधाओं के लिए शासकीय कार्यालयों के चक्कर काटते हुए देखे जा सकते हैं। बताया गया हैं कि शहर के चारों ओर दस साल में सौ से अधिक अवैध कॉलोनियां माफियाओं द्वारा विकसित की गई है। इन कॉलोनियों विकसित कराने में नगर पालिका प्रशासन, जिला प्रशासन इन माफियाओं को भर पूर सहयोग किया जाता हैं। उपभोक्ता की शिकायत के बाद भी इन माफियाओं के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती। एक अनुमान के मुताबिक शासकीय नियम को ताक पर रखकर विकसित की गई कॉलोनियों के कारण सरकार को करोड़ों रूपए का आर्थिक खामियाजा उठाना पड़ रहा हैं। यदि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन शहर के भू माफियाओं के खिलाफ ईमानदारी से कार्यवाही करेगा तो कई भू माफिया जेल के सलाखों के पीछे नजर आयेंगे।
शहर के चारों ओर कृषि योग्य भूमि पर पिछले दस वर्ष में शासकीय नियमों को ताक पर रखकर 100 से अधिक अवैध कॉलोनियां विकसित की गई हैं।   बड़ौदी से लेकर गुना वायपास, फतेहपुर रोड़, रेलवे स्टेशन रोड़, सिंहनिवास, रेलवे स्टेशन के आसपास, ग्वालियर वायपास, केटीएम कॉलेज के पीछे, कत्थामिल के सामने, छत्री रिंग रोड़ पर स्थित कृषि योग्य भूमि को माफियाओं ने किसानों को लालच देकर औने पौने दामों में खरीद लिया और सारे नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम आम उपभोक्ताओं को सुविधाओं का झांसा देकर प्लाट एवं भवन विक्रय कर दिए गए और किए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस, भाजपा व कुछ प्रशासनिक कर्मचारी भूमि के इस खेल कर अरबों रूपए के मालिक बन बेंटे हैं। 
शहर में अधिकांश कॉलोनियां काटी गई, वे बिना मास्टर प्लान और नियमविरुद्ध काटी गई। ऐसे में कृषि भूखंड खरीदने वाले लोगों को अब बिजली के कनेक्शन आज भी विद्युत विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सस्ते और कम दाम के चक्कर में लोगों ने बहकावे में आकर कॉलोनाइजर को लाखों रुपए अदा किए, लेकिन उनसे कॉलोनी में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में कोई पूछताछ नहीं की। ऐसे में अब हाल यह है कि अपने रजिस्ट्रीसुदा प्लॉट पर बिजली कनेक्शन के लिए डिस्कॉम की ओर से उसे हजारों रुपए का डिमांड नोटिस थमाए जा रहे है। जबकि भूखंड खरीदने से पहले अगर कॉलोनाइजर निगम और जलदाय विभाग में आवेदन कर कॉलोनी में संबंधित नेटवर्क डवलप शुल्क अदा करता तो क्रेताओं को यही घरेलू बिजली कनेक्शन सामान्य दर पर मिल सकता था।

अवैध कॉलोनियों में नगर पालिका प्रशासन कर रहा हैं विकास कार्य

शहर में भू माफियाओं द्वारा अवैध रूप से विकसित की गई कॉलोनियों में नगर पालिका प्रशासन नियम विरूद्ध विकास कार्य करने में लगा हुआ हैं। बताया गया है कि माफियाओं द्वारा नगर पालिका में विकास शुल्क, संपत्ति कर, जल कर सहित अन्य करों का भुगतान नहीं किया जाता। जिसके कारण नपा प्रशासन को करोड़ों रूपए का सालाना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा हैं। वहीं दूसरी ओर नगर पालिका प्रशासन माफियाओं से मिलकर इन अवैध कॉलोनियों में विकास कार्य करने में लाखों रूपए खर्च कर रही हैं। जिससे नपा को दो तरफा आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा हें। 

खरीदारों से धोखा
कॉलोनाइजर्स की ओर से जनता के साथ की जा रही धोखाधड़ी और सरकार को हो रहे करोड़ों रुपए के नुकसान को लेकर हाल ही में नया नियम लागू किया गया है। जिसके तहत नगर निकाय किसी भी भूमि के लिए 90ए की कार्रवाई मास्टर प्लान के अनुसार ही कर सकेगी। किसी भी शहरी क्षेत्र में कृषि भूमि पर बिना 90 ए के भूखंड नहीं बेचे जा सकते हैं। इसकी जिम्मेदारी नगरपरिषद या नगरपालिकाओं की रहेगी।

12.5 प्रतिशत निकायों का
कोई भी कॉलोनाइजर कृषि भूमि पर प्लॉटिंग करता है तो इसके लिए उसे उस भूमि में सड़क, सीवेज, बिजली व पानी, मंदिर, पार्क एवं समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का नियम है। ऐसा नहीं होने तक उस कृषि भूमि का 12.5 प्रतिशत हिस्सा नगर निकायों के अधीन रहता है। कृषि भूमि में सारी सुविधाएं मुहैया कराने के बाद इंजिनियर इसका सर्टिफिकेट जारी करता है और उसके बाद निकाय इस 12.5 प्रतिशत हिस्से को रिलीज करती है।

कॉलोनी बसी नहीं रूपांतरण हो गया
शहर की नई बसी कॉलोनियां आज भी  विकास को तरस रही हैं। भू माफियाओं द्वारा कॉलोनी बसाने के दौरान तय मापदंडों का पालन नहीं करने से अधिकांश कॉलोनियों में आज भी मूलभूत सुविधाओं की कमी है। कई कॉलोनियों में बिजली-पानी तक की सुविधा नहीं है। जिससे यहां रहने वाले लोग विभागों के रोज चक्कर काट रहे हैं। इसके अलावा अधिंकाश कॉलाोनियों में पार्क, नालियां और सड़कें भी नहीं है।
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