कुलपति चयन प्रक्रिया में सरकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं :एबीवीपी | Shivpuri News


शिवपुरी। आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई शिवपुरी द्वारा विश्वविद्यालय के कुलपति की चयन प्रक्रिया में कुलाधिपति के अधिकारों के हनन के विरोध में कलेक्ट्रेट पर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
नगर मंत्री आदित्य पाठक ने बताया कि हमें सूत्रों से पता चला है कि कमलनाथ सरकार विश्वविद्यालय में कुलपति चयन प्रक्रिया मैं कुलाधिपति के एकाधिकार को खत्म कर नई संशोधन के माध्यम से राज्य सरकार के प्रतिनिधि को नियुक्ति दे कर कुलपति के चयन प्रक्रिया को राजनीति से प्रभावित करना चाहती है जिसकी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कड़े शब्दों में आलोचना करती है।
पाठक ने आगे बताया कि यह सर्वविदित है कि महामहिम राज्यपाल प्रदेश का सर्वोच्च विधि सम्मत पद है जिन्हें संवैधानिक मान्यताओं के अनुरूप राज्य में उच्च शिक्षा की स्वायत्तता और प्रत्यक्ष राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखते हुए शासन की नीतियों की समीक्षा कर उन्हें क्रियान्वयन के लिए विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति बनाया गया है। उच्च शिक्षा का मूल उद्देश्य ही स्वतंत्र रूप से बिना किसी राजनीतिक एवं शासकीय दबाव के प्रदेश के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं उच्च शिक्षा के नए लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ ही प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास की ऊंचाइयों के शिखर पर पहुंचाना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में उच्च शिक्षण संस्थान कुलाधिपति के मार्गदर्शन में कार्य करते हैं। लेकिन यह ज्ञात हुआ है कि मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार आगामी विधानसभा सत्र में विश्वविद्यालय संशोधन अधिनियम 2019 के माध्यम से माननीय कुलाधिपति की शक्तियां एवं अधिकारों में कटौती करने जा रही है यह कदम उठाकर सरकार यह साबित करना चाहती है कि राज्य सरकार और राज्यपाल अलग-अलग हैं। परंतु उन्हें भी यह जान लेना चाहिए राज्यपाल किसी दल का नहीं अपितु संवैधानिक पद है। सरकार इस संशोधन के माध्यम से पति चयन प्रक्रिया को राजनीतिक हस्तक्षेप से प्रभावित करना चाहती है जिसका अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद तीव्र विरोध करती है।
आदित्य पाठक ने आगे बताया कि यदि कुलपति चयन प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप होने के बाद से कुलपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचेगी साथ ही साथ विश्वविद्यालय के प्रशासनिक व शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित होंगे। आगे चलकर विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर प्रश्नचिन्ह खड़े होंगे और उनकी स्थिति सरकारी निगमों के बराबर हो जाएगी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्य प्रदेश सरकार को आगाह करती है कि विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में विश्वविद्यालय संशोधन अधिनियम 2019 को सम्मिलित ना किया जाए और महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति के अधिकारों एवं शक्तियों का हनन नहीं किया जाए। यदि इसे संशोधन विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत किया तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद राज्य स्तर पर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी जिसकी जवाबदेही शासन कर्ता की होगी।
ज्ञापन के दौरान जिला संयोजक वेदांश सविता राहुल पड़रिया साहिल माथुर निकेतन शर्मा अनुरंजन चतुर्वेदी प्रद्युमन गोस्वामी संदीप शर्मा अमन गुप्ता विकी जैन ऋषभ शेजवार राहुल सोनी के साथ-साथ दो दर्जन से अधिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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